बिहार वाली गलती की तो... राहुल गांधी को अखिलेश ने दिया झटका; यूपी चुनाव के लिए खींच दी 'बड़े दिल' की नई रेड लाइन

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

अखिलेश यादव ने गठबंधन के भीतर किसी तरह की कड़वाहट नहीं होने की बात पर जोर दिया और कहा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को ''बड़ा दिल दिखाना चाहिए'' और अलग-अलग राज्यों में भाजपा के खिलाफ खड़े सबसे मजबूत दल का साथ देना चाहिए।

बिहार वाली गलती की तो... राहुल गांधी को अखिलेश ने दिया झटका; यूपी चुनाव के लिए खींच दी 'बड़े दिल' की नई रेड लाइन

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार (08 जून) को विपक्षी INDIA अलायंस के साथी दलों की महा बैठक थी। इस बैठक में गठबंधन के सभी दल इस बात पर मंथन करने के लिए जुटे थे कि भाजपा के विजय रथ को कैसे रोका जाए? बैठक में नेता विपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां अपने 15 मिनट के संबोधन में सभी साथी दलों से एकजुट रहने की अपील की, वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के सामने ही रेड लाइन खींच दी।

राहुल गांधी के बगल में बैठे अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर पहले सवालों की बौछार की और DMK और AAP को बीच मझधार छोड़ने पर सवाल पूछे। लगे हाथ उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी से क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए बड़ा और उदार दिल दिखाने की अपील की। दरअसल, इस बड़े दिल के बहाने अखिलेश यादव ने राहुल गांधी को अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बड़ा दिल दिखाने के संकेत दिए हैं और दो टूक कहा है कि अगर भाजपा को हराना है तो क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बिठाना ही होगा।

'बिहार की गलती' दोहराने से बचने की चेतावनी

अखिलेश यादव ने इस बैठक में जोर दिया और सभी दलों खासकर कांग्रेस को आगाह किया कि गठबंधन को उत्तर प्रदेश में वैसी गलतियां नहीं करनी चाहिए जैसी गलतियां पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों में की गईं। उन्होंने तथाकथित "बिहार मिस्टेक" का हवाला देते हुए कहा कि सीटों के बंटवारे में देरी, संभावित जीत से अधिक सीट पर दावा, गठबंधन के भीतर खींचतान और सीएम चेहरे को लेकर भ्रम ने वहां चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुँचाया था। अखिलेश ने इशारा किया कि अगर बिहार की गलती से सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश में सीटों का बंटवारा समय रहते हो जाए तो भाजपा के खिलाफ एक ठोस घेराबंदी की जा सकती है।

क्षेत्रीय दलों का सम्मान और राजनीतिक वास्तविकता

बड़े दिल की बात कहकर अखिलेश ने एक तरह से राहुल गांधी को इशारा दे दिया है कि यूपी चुनावों में कांग्रेस छोटी हिस्सेदारी की ही बात करे और भाजपा को हराने के लिए क्षेत्रीय दल की हरसंभव मदद करें। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव का यह कतई तर्क नहीं है कि कांग्रेस को चुनावी मैदान से हट जाना चाहिए, बल्कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस उन राज्यों में राजनीतिक वास्तविकताओं को पहचाने जहाँ क्षेत्रीय दल अधिक मजबूत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 के चुनावों में सीटों का आवंटन केवल किसी दल की 'आकांक्षा' पर नहीं, बल्कि 'जीतने की क्षमता' पर आधारित होना चाहिए।

2024 के प्रदर्शन ने बढ़ाया हौसला

दरअसल, अखिलेश यादव की इस मुखरता और स्पष्टवादिता के पीछे 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजे हैं। उस चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें सपा ने 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी, जबकि कांग्रेस को 7 सीटों पर जीत मिली थी। तब सपा ने 67 और कांग्रेस ने 17 सीटों यानी करीब 25 फीसदी सीटों पर चुनाव लड़ा था। बकौल अखिलेश यादव, इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि क्षेत्रीय दल के रूप में सपा, उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने के लिए मुख्य धुरी है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कांग्रेस ने फिर से उसी अनुपात में और क्षेत्रीय सहयोगी के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चुनाव लड़ा तो भाजपा को हराया जा सकता है।

2027 का रोडमैप: एकजुटता और जिताऊ सीट का फार्मूला

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अखिलेश का संदेश साफ है कि दोनों दलों के बीच सीटों का शीघ्र बंटवारा हो ताकि चुनावी रणनीति और चुनाव प्रचार में समय मिल सके। इसके अलावा सार्वजनिक विवादों से बचाव के तरीके अपनाए जाने चाहिए ताकि गठबंधन के भीतर के मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर आने से रोका जा सके। अखिलेश का जोर क्षेत्रीय सहयोगियों को प्राथमिकता देने पर है। खासकर उन क्षेत्रों में स्थानीय दलों को कमान सौंपना जहाँ उनकी पकड़ मजबूत है। ऐसे में साफ है कि अखिलेश यादव का 'बड़ा दिल' वाला आह्वान दो टूक संदेश देता है कि कांग्रेस 2027 के रण में 2024 की ही तरह करीब 25 फीसदी सीटों यानी करीब 100 सीटों तक दावा करे और भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ मजबूती से खड़ा रहे।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।