यूपी : जुलाई के बिजली बिल में मिलेगी सबसे बड़ी राहत, सरचार्ज पर आयोग की सख्ती का दिखेगा असर
बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई महीने के बिल में 4.43 फीसदी कम भुगतान करना होगा। ईंधन अधिभार शुल्क की गणना के लिए बीते दिनों नियामक आयोग द्वारा जारी आदेश का असर दिखाई देगा। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं पर ईंधन अधिभार शुल्क लगाया जा रहा है। नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से इस पर जवाब तलब किया था।

UP Electricity News : उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए गुड न्यूज है। जुलाई के महीने में उन्हें बिजली बिल में सबसे बड़ी राहत देने की तैयारी है। उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिल में 4.43 फीसदी कम भुगतान करना होगा। ईंधन अधिभार शुल्क की गणना के लिए बीते दिनों नियामक आयोग द्वारा जारी आदेश का असर जुलाई के बिजली बिल में दिखाई देगा। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं पर ईंधन अधिभार शुल्क लगाया जा रहा है। दर पॉजिटिव होने पर उपभोक्ताओं को बिल पर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है जबकि नेगेटिव होने पर उतने प्रतिशत कम भुगतान करना पड़ता है। इसी फॉर्मूले के तहत इस साल मार्च में हुए खर्च की गणना करते हुए जून के बिजली बिल में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत की वसूली की गई थी। इस गणना पर सवाल उठने के बाद पावर कॉरपोरेशन ने स्वीकार किया था कि उसने मार्च में पुराना बकाया भुगतान भी किया था, जिसकी रकम जोड़कर अधिभार शुल्क की गणना की गई थी।
नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से इस मसले पर जवाब तलब किया था, तब उसने यह भी बताया कि बीते 14 महीनों में वह बकाया भुगतान की रकम को जोड़ते हुए ही अधिभार शुल्क की गणना कर रहा है। इस पर नियामक आयोग ने सख्ती दिखाते हुए आदेश दिए थे कि ईंधन अधिभार शुल्क की गणना महीने में हुए वास्तविक ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर खर्च के एवज में की जाए। आयोग ने पुराना बकाया भुगतान को अधिभार शुल्क में जोड़ने को गलत बताया था।
आयोग के आदेश के बाद जुलाई में वसूली जाने वाली रकम की गणना की गई तो अधिभार शुल्क की दरें नेगेटिव आई हैं। यह शुल्क अप्रैल महीने में हुए खर्च के एवज में लिया जाएगा। राज्य भर के उपभोक्ताओं को कुल 358.31 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। इससे पहले अब तक सबसे बड़ी राहत उपभोक्ताओं को मार्च 2026 के बिजली बिल में मिली थी। तब बिल में 2.42 प्रतिशत की कमी हुई थी।
घटी दरों में खरीद का मिला लाभ : उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में बिजली खरीद की लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट तय की थी। वहीं, अप्रैल 2026 में वास्तविक बिजली खरीद 4.78 रुपये प्रति यूनिट रही। उपभोक्ताओं को राहत की बड़ी वजह खरीद की रकम का यह अंतर ही है। जून में हुई गलत वसूली के बाद यह आदेश न केवल उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक राहत है बल्कि उपभोक्ताओं की कानूनी लड़ाई की महत्वपूर्ण जीत भी है। जब भी कानून के मुताबिक अधिभार शुल्क की गणना की जाती है तब-तब उपभोक्ताओं को लाभ मिलता है। अनदेखी पर ही उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। अवधेश ने कहा कि जून में 2000 करोड़ की अतिरिक्त वसूली और अन्य महीनों में ली गई अतिरिक्त रकम भी पावर कॉरपोरेशन को वापस करनी होगी।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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