
यूपी में 80 हजार उद्योगों को बड़ी राहत, फैक्ट्री से खतरनाक रसायन पर सजा खत्म, अब सिर्फ जुर्माना
यूपी के करीब 80 हजार उद्योगों को बड़ी राहत मिल गई है। अब फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण और खतरनाक रसायन के लिए केस हुआ तो सजा नहीं होगी। अब केवल जुर्माना लगाया जाएगा। यूपी में हर साल 300 से 400 औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर कार्यवाही होती है। अभी तक पांच साल तक की सजा का प्रावधान था।
प्रदेश के उद्योग जगत के लिए अच्छी ख़बर है। उद्योगों से मानक से अधिक खतरनाक रसायनों के निकलने पर अब संचालकों को सजा नहीं होगी। इसके बदले उन पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यह दंड अधिकतम 15 लाख रुपये या 10 हजार रुपये प्रतिदिन तक होगा। इस बदलाव का लाभ प्रदेश के करीब 80 हजार उद्योगों को होगा। वहीं सरकार पर मुकदमों का बोझ भी घटेगा। इस बदलाव से जुड़े संकल्प को कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विधानमंडल के पटल पर रखा गया है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने जल प्रदूषण संबंधी नियमों में बदलाव किया था। इन बदलावों को संसद ने 15 फरवरी 2024 को मंजूरी दी थी। इसे जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम-2024 कहा गया। व्यापारिक सुगमता के लिहाज से यह एक बड़ा कदम है। अब इसे यूपी में भी लागू किए जाने की तैयारी है। मंगलवार को इससे जुड़े संकल्प को पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना ने इसे विधान परिषद के पटल पर रखा।
सरकार ने व्यापारिक सुगमता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। असल में जल आधारित उद्योगों को प्रदूषण की दृष्टि से रेड, ओरेंज और व्हाइट तीन श्रेणियों में रखा गया है। इनके लिए मानक तय किए गए हैं। राज्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय मानकों का तिमाही से लेकर सालाना तक अलग-अलग शेड्यूल के हिसाब से निरीक्षण करते हैं। पहले उद्योगों से मानक पूरे न करने या मानक से अधिक खतरनाक रसायन युक्त पानी के निकलने पर उनके खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कोर्ट केस करते हैं। इसमें अधिकतम पांच साल तक सजा का प्रावधान है। यूपी की बात करें तो हर साल 300 से 400 के बीच उद्योगों पर जल प्रदूषण से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर कार्यवाही की जाती है। माना जाता है कि इन खतरनाक रसायनों के जमीन में जाने पर जलस्त्रोतों का पानी प्रदूषित होने का खतरा रहता है।
बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति के नियम केंद्र तय करेगा
इस बदलाव के लागू होने के बाद प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति तो प्रदेश सरकार करेगी। मगर इस पद के लिए जरूरी अर्हता और नियुक्ति संबंधी नियमावली केंद्र सरकार तय करेगी। इससे प्रदेश के सभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में एकरूपता रहेगी। इसके अलावा बोर्ड के विभिन्न प्रारूप भी केंद्र तय करेगा।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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