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गुनाहो से मगफिरत की रात, शब-ए-बारात पर्व आज

गुनाहो से मगफिरत की रात, शब-ए-बारात पर्व आज

संक्षेप:

Bhadoni News - भदोही में शब-ए-बरात पर्व 3 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन लोग कब्रिस्तानों में सफाई कर पूर्वजों के लिए फातिहा पढ़ते हैं। मस्जिदों में अल्लाह की इबादत की जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह रात गुनाहों से तौबा और दुआ करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

Feb 02, 2026 11:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भदोही
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भदोही, संवाददाता। इबादत और गुनाहों से तौबा करने वाला पर्व शब-ए-बरात आज यानि तीन फरवरी मंगलवार को मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों को लेकर सोमवार को पूरे दिन लोगों ने पसीना बहाया। कब्रिस्तानों में सफाई का दौर देर शाम तक चला। साथ ही घर में व्यंजनों को बनाने की रेसपी तैयारी की गई। बता दें कि शब-ए-बारात की रात को मस्जिदों में अल्लाह तआला की इबादत करने से दुनियावी तालिम को बढ़ावा और जीवन भर सुख-शांति, गुनाहों से मुक्ति मिलती है। वहीं कब्रिस्तानों में पहुंच कर पूर्वजों की कब्र पर फातिहा पढ़ी जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह रात साल एक बार शबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है।

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मुसलमानों के लिए यह रात बेद फजीलत की रात भी मानी जाती है। इस दिन सभी मुसलमान अल्लाह की इबादत कर दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बारात से मिलकर बना है। जहां शब का अर्थ रात होता है तो वहीं बारात का मतलब बरी होना है। मुस्लिम परिवारों में तरह-तरह के पकवानों को तैयार कर पूर्वजों के नाम फातिहा दी जाती है। शिरनी-तबर्रख के रूप में बने पकवानों को वितरित किया जाता है। नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से रात तक मस्जिदों एवं कब्रिस्तानों पर लोगों के पहुंचने क्रम चलता रहता है। जामा मस्जिद गोपीगंज के पेश इमाम हाफिज अनीशुल कादरी ने कहा कि शब ए बरात की रात फालतू बातों से दूर रह कर सिर्फ अल्लाह की इबादत में मसरूफ रहना चाहिए। उन्होंने शोरगुल ना करने का लोगों से आह्वान किया। गुनाहों से मगफेरत (माफी) और पुरखों के लिए प्रार्थना करने वाले प्रमुख पर्व शब-ए-बरात पर्व तीन फरवरी को मनाया जाएगा। मौलाना ने कहा कि शब-ए-बरात रूप में अल्लाह ताअला ने एक ऐसी रात का तोहफा दिया है, जिसमें की गई इबादत अन्य दिनों की इबादत से हजार गुना बेहतर होती है। इसका जहां सवाब अधिक मिलता है वहीं अल्लाह की बारगाह में मांगी गई दुआएं कबूल होती हैं। कहा कि कब्रिस्तानों में जाकर अपने परिवार के बुजुर्गों की मगफेरत (क्षमा) के लिए दोआ करनी चाहिए।