
राष्ट्रीय संगोष्ठी-अभिलेख प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने की प्रतिभाग
Bhadoni News - राष्ट्रीय संगोष्ठी-अभिलेख प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने की प्रतिभाग गोष्ठी-अभिलेख प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने की प्रतिभाग गोष्ठी-अभिलेख प्रदर्शनी
ज्ञानपुर, संवाददाता। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं अभिलेख प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। इसमें विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर अपना विचार व्यक्त की। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर रमेशचंद्र यादव एवं आलोक प्रसाद और केशव मिश्र ने संयुक्त रूप से की। विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर आशुतोष पार्थेश्वर, डॉ. अंशुबाला एवं डॉ. रश्मि सिंह और डॉ. शिवनारायण ने अपना विचार व्यक्त करते हुए शिक्षकों संग अपना अनुभव साझा किए। इस दौरान डॉ. रश्मि सिंह ने स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं की चौतरफा भागेदारी को स्पष्ट करते हुए 1930 बनारस दालमंडी कोठे की राजेश्वरी बाई के गीत भारत कभी न बन जाए गुलाम खाना का जिक्र किया।
जिसका स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान है। प्रो. आलोक प्रसाद ने अभिलेख प्रदर्शनी के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए चंद्रशेखर आजाद के पत्रों का जिक्र किया और काकोरी कांड में शामिल 250 लोगों के लिखे नामों की सराहना किया। महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे स्वतंत्रता संग्राम में स्वराज, सत्याग्रह, चरखा में महिलाओं की भागीदारी को स्पष्ट किया। डॉ. शिवनारायण ने कहा कि महिला केंद्रित इतिहास लिखे जाने की जरूरत है। डॉ. अंशुबाला ने कहा कि पुरुष सत्तात्मक ढांचे में रहकर महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़कर भाग लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश संस्कृत विभाग को साधुवाद दिया जो 75 वर्ष बाद महिलाओं के योगदान को प्रसारित कर रहा है। प्रो. आशुतोष पार्थेश्वर ने हिंदी कहानियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की सहभागिता को रेखांकित किया। प्रो. केशव मिश्र ने इतिहास लेखन में महिला को लेकर शब्दावलियों में बदलाव की जरूरत की चर्चा की और स्वतंत्रता को समग्रता में महिला के संदर्भ में समझने की जरूरत है। इस मौके पर यानंद सिंह चौहान, कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. ज्योति यादव, डॉ. ऋचा उपस्थित थीं।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




