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फसलों को चौपट कर रहे आवारा पशु, किसान परेशान

आवारा पशुओं के आतंक से किसान त्रस्त हैं। खेतों में बोए गए फसलों को छुट्टा पशु चट्ट कर जा रहे हैं। दिन भर खेतों में हाड़तोड़ मेंहनत करने के बाद किसान पूरी रात फसलों की रखवाली करने को विवश हैं। खेतों में तैयार हो रहे फसलों को कैसे बचाया जाए यह कृषक समझ नहीं पा रहे हैं। अन्नदाताओं का ध्यान बंटा नहीं कि खेतों में घुसे लावारिस पशु व घड़रोजों का झूंड पल भर में फसलों को नष्ट कर दे रहे हैं। घड़रोज के साथ आवारा पशुओं में बढ़ोत्तरी होने से किसानों का सुख-चैन हराम हो गया है। क्षेत्र के अमीरपट्टी, कठारी, पुरुषोत्तमपुर, महदेवां, नुआंव, कोड़रपट्टी, दलपतपुर, करेणुआं सहसेपुर, भवानीपुर, चकजोधी, बारीगांव, महदेपुर, मेघीपुर व कैयरमऊ में आवारा मवेशियों का आतंक बढ़ गया है। खेतों में बोए अरहर, तिल, उर्द, चरी व धान की आवारा पशु चरकर साफ कर दे रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में बेतहासा बढ़ रहे छुट्टा पशु से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेत में जानवर चरने को लेकर आए दिन पशु स्वामियों व किसानों में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। कई बार तो मामला थाने तक पहुंच जा रहा है लेकिन आवारा पशुओं के सामने हर कोई लाचार नजर आ रहा है। किसानों की माने तो दो दशक पूर्व खेतों में घड़रोज व जानवरों से फसलों को बचाने के लिए सिवान में मचान लगाने व धोख गाड़ने की प्रथा थी। पुराने कपड़े, मटकी व डंडे के सहारे धोख को गाड़ा जाता था। वहीं ऊंचे मचानों पर बैठे किसान फसलों की रखवाली करते थे। अब यह प्रथा भी खत्म हो गई है। सिवान में चक्रमण कर रहे लावारिस पशु किसानों के मेहनत की कमाई नष्ट कर दे रहे हैं।  

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