गैस सिलेंडर किल्लत संग लकड़ी-कोयला महंगा
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भदोही, संवाददाता। अमेरिका-इजरायल युद्ध फिलहाल सीजफायर होने से रुका हुआ है लेकिन गैस सिलेंडर की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लगन में कमर्शियल गैस सिलेंडर के अभाव होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। गैस सिलेंडर का संकट बढ़ा तो लकड़ी और कोयले के दाम में भी इजाफा हो गया है। ऐसे में जिन घरों में शादी पड़ी है उनके सामने ईंधन की विकट समस्या खड़ी हो गई है। गैस सिलेंडर, लकड़ी, कोयला संग खाद्य पदार्थ के दाम बढ़ गए हैं। जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार के मुताबिक केवाईसी के 48 घंटे बाद गैस सिलेंडर की बुकिंग हो रही है।
एक सप्ताह में गैस सिलेंडर भी उपभोक्ताओं को मिल रहा है। हालांकि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी बनी हुई है। वहीं, उपभोक्ताओं की माने तो कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति न होने से शादी के सीजन में खाना कैसे बनाए इसको लेकर वे चिंतित हैं। लकड़ी और कोयला के दाम में भी इजाफा हो गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने से होटल-ढाबा पर व्यंजनों की संख्या घट गई है। लकड़ी का दाम छह रुपये से बढ़कर आठ रुपये प्रति किलो हो गया है जबकि कोयला 22 से बढ़कर 45 रुपया प्रति किलो हो गया है। कोयला-लकड़ी का दाम बढ़ने से लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण अंचल में तो लोग लकड़ी से भी भोजन और नाश्ता तैयार कर ले रहे हैं लेकिन नगरीय इलाका में रहने वालों के सामने ईंधन की विकट समस्या खड़ी हो जा रही है। हालांकि कुछ लोग इंडेक्शन खरीदकर किसी तरह काम निकाल ले रहे हैं। महंगाई की मार से इन दिनों हर तबका कराह रहा है। शादी में हर सामान के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में लोग अपनी मर्यादा को कैसे बचाएं यह समझ नहीं पा रहे हैं। युद्ध पर विराम तो लगा लेकिन लोगों की समस्या कम होने के बजाए अब बढ़ने लगी है।होटल-रेस्टोरेंट में घटा व्यंजनज्ञानपुर। गैस किल्लत लोगों का स्वाद भी प्रभावित करने लगा है। होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट में तमाम व्यंजनों का बनना कम हो गया है। इन दिनों चाउमीन, मसाल डोसा, इडली, सांभर समेत तमाम व्यंजन को बनाना लोग खत्म कर दिए हैं। ऐसे में दुकानों और होटलों में सिर्फ छोला-समोसा, भोजन, जलेबी और चाय मिल रहा है। दुकानदारों की माने तो गैस सिलेंडर किल्लत से आम इतना प्रभावित हो गया है कि आधा कारीगरों को वापस भेजना पड़ गया है। मध्यम वर्गीय व्यापारियों का धंधा ईंधन के अभाव में 40 फीसदी प्रभावित हो गया है।ग्रामीण अंचलों में घर के बाहर बन रहा भोजनज्ञानपुर। ग्रामीण अंचलों में भी लोग पक्का मकान बनाने के साथ ही पेंटिंग करा लिए हैं। ऐसे में रसोई घर में गैस सिलेंडर से ही भोजन बना रहा था। लेकिन गैस किल्लत शुरू हुआ तो लोग चूल्हा और भट्टी को प्राथमिकता देने लगे। ऐसे में पक्का भवन धुआं से गंदा न हो जाए, इसलिए लोग घर के बाहर चूल्हा बनवाकर भोजन तैयार कर रहे हैं। एक तरफ महिलाएं भोजन बना ही हैं, तो दूसरी तरफ लोग गर्मी में घर के बाहर बैठकर आपस में बात करते दिख रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में रात्रि का दृश्य देख ऐसा लगता है कि मानों ढाई दशक का पुरानी याद को ताजा कर दे रही है।
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