गेहूं में रोग नियंत्रण से बचाव को गंभीर रहें किसान
Bhadoni News - भदोही, संवाददाता। गेहूं फसल में लगने वाले सामयिक कीट, रोग व खतरपतवार से नियंत्रण

भदोही, संवाददाता। गेहूं फसल में लगने वाले सामयिक कीट, रोग व खतरपतवार से नियंत्रण के लिए किसानों को गंभीर रहने की जरुरत है। फसल में बीमारी का लक्षण दिखते कि कृषक तत्काल कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के हेड एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि रबी की प्रमुख फसलों में गेहूं का सर्वोच्च स्थान है। इसमें लगने वाले सामयिक कीट, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन करके उत्पादन में होने वाली क्षति से बचा जा सकता है। ऐसा करने पर पर करीब 30 फीसदी तक उत्पादन बढ़ेगा। ब्यूवेरिया बैसियाना 1.15 प्रतिशत की 2.5 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 60 से 70 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छीटा देकर 8 से 10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुआई के पहले भूमि में मिला देने से दीमक सहित भूमि जनित कीटों का नियंत्रण हो जाता है।
भूमि जनित एवं बीज जनित रोगो से नियंत्रण को ट्राइकोडरमा हारजिएनम विरडी एक प्रतिशत डब्ल्यूपी अथवा ट्राइकोडरमा हारजिएनम दो प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 किग्रा मात्रा से 60 से 70 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छीटा देकर आठ से 10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुआई के पूर्व आखिरी जुताइ पर भूमि में मिला देना चाहिए। ऐसा जतन कर किसान फसलों को होने वाले नुकशान से बचा सकते हैं।

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