गेहूं के डंठल की बायोचार से बनेगी खाद, राहत
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भदोही, संवाददाता। जिले के अन्नदाताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब पराली, सरसों, गेहूं फसल के सूखे डंठल, सरपत आदि से बायो-चार (देशी खाद) बनेगी। उक्त खाद से धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ ही फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। बायोचार (जैविक खाद) के प्रयोग से मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों की कमी पूरी होगी। इसका फायदा यह होगा कि खेतों में यूरिया खाद नहीं डालना पड़ेगा। गत दिनों सीतामढ़ी में बायोचार बनाने का विधिवत ट्रायल किया गया। खास बात यह है कि किसानों को बायोचार बनाने के लिए ट्रेनिंग मिलेगी। जिसका फायदा यह होगा कि किसानों को अब फसलों के पराली, डंठल को जलाना नहीं पड़ेगा।
इस साधारण प्रोजेक्ट की तकनीकी स्विट्जरलैंड की है। प्रोजेक्ट की शुरूआत कराने वाले महाराष्ट्र के गौतम का कहना है कि बायोचार से तीन समस्याएं सुलझती हैं। कहा कि मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी है, बायोचार से मिट्टी की क्षमता बढ़ेगी और धरती का पोषण होगा। बताया कि बायोचार पद्धति में फसलों के अनुपयुक्त डंठल, पराली आदि को बिना ऑक्सीजन के जलाकर शुद्ध कार्बन यानी कोयला बनाकर उसमें गोबर और कंपोस्ट मिला कर जैविक खाद बनाते हैं।
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