सावधान, डेंगू का वायरस तंत्रिका तंत्र पर कर रहा हमला; लकवा का भी बन सकता है कारण
तंत्रिका तंत्र पर डेंगू के वायरस का प्रभाव इस कदर पड़ता है कि इलाज में देरी होने पर मरीज लकवा का भी शिकार हो सकता है। डेंगू के बदलते स्वरूप से संबंधित यह चौंकाने वाला तथ्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की ओर से किए गए शोध में सामने आया है।
डेंगू को मुख्य रूप से बुखार और प्लेटलेट्स घटाने वाली बीमारी के तौर पर माना जाता है। आम धारणा है कि इसका वायरस सिर्फ खून को ही प्रभावित करता है लेकिन हालिया शोध से पता चला है कि यह वायरस मरीज के तंत्रिका तंत्र पर भी असर डालता है। तंत्रिका तंत्र पर इसका प्रभाव इस कदर पड़ता है कि इलाज में देरी होने पर मरीज लकवा (क्वाड्रिप्लेजिया) का भी शिकार हो सकता है। डेंगू के बदलते स्वरूप से संबंधित यह चौंकाने वाला तथ्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की ओर से किए गए शोध में सामने आया है।

मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. पूनम गुप्ता ने बताया कि टीम ने तीन ऐसे डेंगू मरीजों पर अध्ययन किया, जिनके शरीर के चारों अंग में लकवा (क्वाड्रिप्लेजिया) हो चुका था। इनमें से एक मरीज ऐसा था, जिसकी रीढ़ की हड्डी में खराबी से उसका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था। डॉक्टरों की भाषा में इस स्थिति को एलईटीएम (लॉन्गिटयूडनिल एक्सटेंसिव ट्रांसवर्स मायलाइसिस) कहते हैं। दूसरे मरीज के खून में पोटैशियम की कमी पाई गई, इस वजह से उसके शरीर में कमजोरी हो गई थी। इस स्थिति को हाइपोकैलिमिक पैरालिसिस कहते हैं।
वहीं, तीसरे मरीज की मांसपेशियों में सूजन और दर्द पाया गया, जिसे डॉक्टर डेंगू मायोसाइटिस कहते हैं। अध्ययन में एक सुखद बात यह सामने आई कि समय पर हुए इलाज से डेंगू के यह तीनों मरीज पूरी तरह के स्वस्थ हो गए। डॉक्टरों की टीम ने पाया कि जिस मरीज की रीढ़ की हड्डी में खराबी से उसका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था, वह बाकी दो मरीजों की तरह ही जल्दी स्वस्थ हुआ। बकौल डॉ. पूनम यह अध्ययन इस बात का प्रमाण है कि डेंगू का वायरस केवल खून को ही नहीं बल्कि तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। अगर डेंगू के मरीज में अचानक कमजोरी आती है या फिर चलने में कठियाई या हाथ-पैर में सुन्नपन जैसे लक्षण सामने आते हैं तो उसे तत्काल उचित चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
लिवर, किडनी, फेफड़े पर भी होता है असर
डॉ. गुप्ता ने बताया कि अध्ययन से यह भी पता चला कि डेंगू का प्रभाव लिवर, किडनी, फेफड़ा तथा आंख के पीछे वाले भाग पर भी पड़ता है। शोध टीम में डॉ. गुप्ता के साथ डॉ. अजीत कुमार चौरसिया, डॉ. आशीष राय, डॉ. अर्चना ओझा और डॉ. मधुरिमा सिंह भी शामिल रहे। इससे जुड़ा शोध पत्र स्विटजरलैंड से प्रकाशित होने वाले अंतरराष्ट्रीय जर्नल एसएन कंपरहेन्सिव क्लीनिकल स्प्रिंगर नेचर के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है। इस शोध पत्र के आने के साथ ही चिकित्सा जगत में डेंगू के बदलते स्वरूप और उपचार की नवीनतम तकनीक पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।



