Hindi NewsUttar-pradesh NewsBasti NewsTragic Delay Boy Dies After Electric Shock Due to Ambulance Delay
नाराज ग्रामीणों ने सीएचसी मुंडेरवा में शव रखकर जताया विरोध

नाराज ग्रामीणों ने सीएचसी मुंडेरवा में शव रखकर जताया विरोध

संक्षेप:

Basti News - बस्ती में 14 वर्षीय शिखर करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे सीएचसी में इलाज के लिए लाया गया, लेकिन एंबुलेंस के लिए दो घंटे इंतजार करना पड़ा। जब तक एंबुलेंस आई, शिखर की हालत बिगड़ गई और उसे प्राइवेट एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

Nov 18, 2025 11:04 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बस्ती
share Share
Follow Us on

बस्ती। करंट लगने से गंभीर रूप से घायल बालक का सीएचसी में तड़पता रहा और तकरीबन दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची, इंतजार में दम तोड़ दिया। बालक की हालत गंभीर देख चिकित्सक ने उसे रेफर कर दिया था। एंबुलेंस नहीं पहुंची तो परिजनों ने बालक को प्राइवेट एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल पहुंचाया जहां चिकित्सक ने उसे देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। नाराज ग्रामीण बालक का शव लेकर सीएचसी पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। अधिकारियों के काफी समझाने के बाद ग्रामीण माने और शव लेकर चले गए। नगर पंचायत मुंडेरवा निवासी बबलू चौधरी का पुत्र शिखर (14) विद्यालय से पढ़कर घर लौटा।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

प्यास लगने पर वह नल पर पानी पीने चला गया। नल में करंट उतर रहा था। वह जैसे ही नल का हत्था पकड़ा उसे करंट लग गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घर पर उसकी दादी व दो चाची मौजूद थीं। उनके शोर मचाने पर लोग पहुंचे और शिखर को सीएचसी मुंडेरवा पहुंचाया। चिकित्सक डॉ. अंकुर शुक्ल और फार्मासिस्ट गुलाब चौधरी ने ऑक्सीजन लगाकर इलाज शुरू किया और एंबुलेंस बुलाने को कहा। परिजनों का कहना है कि उन्होंने 108 पर कॉल किया लेकिन दो घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इधर शिखर की हालत बिगड़ती जा रही थी। विवश होकर परिजन प्राइवेट एंबुलेंस से उसे लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस सम्बंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया। वह नहीं पहुंची। मौके पर एक एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन उसके चालक ने कहा कि उसके पास केस है। अगर एंबुलेंस मरीज को जिला अस्पताल ले गई होती तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।