
कथा में भक्ति प्रसंग सुनकर भाव विह्वल हुए श्रोता
संक्षेप: Basti News - सोहगिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा का पहला दिन धूमधाम से मनाया गया। कथावाचक आचार्य रामगोपाल शुक्ल ने प्रभु भक्ति और मानव उद्धार पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे नारद ने प्राणियों के दुखों के नाश के लिए एक श्रेष्ठ व्रत का ज्ञान प्राप्त किया। कथा में कई भक्त शामिल हुए।
छावनी। क्षेत्र के सोहगिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा का प्रथम दिवस धूमधाम से संपन्न हुआ। कथावाचक आचार्य रामगोपाल शुक्ल ने प्रभु भक्ति और मानव उद्धार के प्रसंगों का वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि एक बार नैमिषारण्य तीर्थ में सनकादि ऋषियों ने पुराणवेत्ता सूत जी से प्रश्न किया, हे सूत जी। कलयुग में वेद-विद्या से रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति कैसे प्राप्त होगी, उनका उद्धार किस प्रकार होगा। कोई ऐसा व्रत या तप बताइए, जिससे थोड़े समय में पुण्य प्राप्त हो और मनवांछित फल मिले। हम ऐसी कथा सुनना चाहते हैं। सूत जी ने उत्तर दिया कि हे वैष्णवों, आपने प्राणियों के हित की उत्तम बात पूछी है।

अब मैं वह श्रेष्ठ व्रत बताता हूं, जिसे नारद के पूछने पर स्वयं लक्ष्मी-नारायण भगवान ने उन्हें बताया था। कथा आगे बढ़ाते हुए आचार्य ने कहा कि नारद दूसरों के हित की इच्छा से मृत्युलोक में भ्रमण कर रहे थे। वहां विभिन्न योनियों में जन्मे मनुष्यों को अपने कर्मफलों से अनेक दुखों से पीड़ित देखकर वे चिंतित हुए। उन्होंने विचार किया कि प्राणियों के दुखों का नाश कैसे होगा। कथावाचक ने जोर देकर कहा कि ‘भगवत’ शब्द के प्रत्येक अक्षर में गूढ़ अर्थ छिपा है, जो भय से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग दिखाता है। इस दौरान रामप्रकाश मिश्रा, सुभाषचंद्र मिश्र, द्वारिका प्रसाद, राम सिंह, रामजनक यादव, कुंदन राम, अशोक सिंह, सुनील सिंह, शिवम मौर्य उपस्थित रहे।

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