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कूड़े की तरह भेजे जा रहे कोविड जांच के आरटीपीसीआर सैम्पल

हिन्दुस्तान टीम,बस्तीPublished By: Newswrap
Thu, 27 May 2021 04:11 AM
कूड़े की तरह भेजे जा रहे कोविड जांच के आरटीपीसीआर सैम्पल

बस्ती। सज्जाद रिजवी/ आलोक मिश्रा

कोविड की जांच में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां से जांच के लिए कोविड जांच का आरटीपीसीआर सैम्पल कूड़े की तरह भेजा जा रहा है। सैम्पल खराब होने से जांच नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा इस बात की शिकायत शासन, डीएम व सीएमओ तक से की जा चुकी है। अब तक पांच हजार से ज्यादा सैम्पल खराब हो चुके हैं। जबकि वहीं जांच कराने के बाद रिपोर्ट के लिए लोग कई दिनों तक भटकते रहते हैं।

मेडिकल कॉलेज की कोविड लैब जांच के अधिकारियों का कहना है कि सीएमओ कार्यालय से आरटीपीसीआर का जो सैम्पल भेजा जा रहा है, उसमें बहुत लापरवाही की जा रही है। वीटीएम पर मरीज की आईडी तक नहीं होती है। डिब्बा खुला होता है तथा एक डिब्बे में मानक से ज्यादा सैम्पल ठूस कर भर दिए जाते हैं। लैब पहुंचते समय सैम्पल डिब्बे से बाहर हो जाता है, जिससे वह खराब हो जा रहा है।

जांच में हो रहे खेल का अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि मंडल स्तर के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का सैम्पल लिया गया, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट समय से नहीं मिल सकी। एसीएमओ डॉ. एफ हुसैन का कहना है कि सैम्पलिंग में पूरा एहतियात बरता जा रहा है। लैब से जो भी शिकायत मिलती है, उसे दूर कराने का प्रयास किया जाता है।

फर्जी कंसाइनमेंट भेजने का है आरोप

सीएमओ कार्यालय से आरटीपीसीआर का फर्जी कंसाइनमेंट भेजा जा रहा है। लैब स्टॉफ द्वारा जब कंसाइनमेंट से सैम्पल मिलाया जाता है तो मालूम होता है कि सैम्पल का डिब्बा ही गायब है। इस बात की कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुधार नहीं हो रहा है। जानकारों की माने तो सैम्पलिंग की खानापूर्ति के खेल में यह सब किया जा रहा है।

रिपीट सैम्पल की रिपोर्ट न भेजने का है दबाव

लैब के अधिकारियों का कहना है कि जो सैम्पल खराब हो जा रहे हैं, या नहीं मिल रहे हैं, उसके लिए रिपीट सैम्पल की रिर्पोट भेजी जाती है। इसे लेकर अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से लैब के अधिकारियों से आपत्ति की जा रही है। जानकारों की माने तो बड़े पैमाने पर रिपीट सैम्पल कराने की बजाए मामले को रफा-दफा कर दिया गया है। अगर इसकी जांच हो तो बड़े पैमाने पर गलत आंकड़ा सामने आ सकता है।

तीन ब्लॉकों से ज्यादा आ रही है शिकायत

जिले के तीन ब्लॉकों से खराब तरीके से सैम्पल भेजने की ज्यादा शिकायत आ रही है। यहां से जो आरटीपीसीआर का जो सैम्पल भेजा जा रहा है, अक्सर वह खराब हो जा रहा है। इसे लेकर लैब के अधिकारियों द्वारा कई बार आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

समय से रिपोर्ट न मिलने से बढ़ा संक्रमण का खतरा

आरटीपीसीआर रिपोर्ट समय से न मिलने पर या सैम्पल गायब हो जाने पर कोविड संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। काफी लोग कोविड के लक्षण होने पर आरटीपीसीआर जांच करा रहे हैं। रिपोर्ट न आने से वह अपने को निगेटिव मानकर घूम रहे हैं, रिपोर्ट के इंतजार में कितने लोग पॉजिटिव से निगेटिव हो जा रहे हैं, लेकिन इस दौरान वह जितने लोगों को संक्रमित कर दे रहें, उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। यात्रा करने वालों को समय से रिपोर्ट न मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

72 घंटे होती है आरटीपीसीआर सैम्पल की लाइफ

आरटीपीसीआर सैम्पल की लाइफ लगभग 72 घंटे ही होती है, इसके बाद यह खराब हो जाता है। सीएमओ कार्यालय से आम तौर से दूसरे दिन सैम्पल भेजा जाता है। सैम्पल रिसीव होने के छह घंटे के अंदर सभी सैम्पल की रिसीविंग मेडिकल कॉलेज के लैब के पोर्टल पर दिखने लगती है। डिब्बा खुला होने पर उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे मामले में रिपीट सैम्पल रिक्वायर्ड लिखा जाता है।

सीएमओ कार्यालय से जो सैम्पल आ रहे हैं, उनमें से काफी सैम्पल खराब हालत में आ रहे हैं, जिस कारण उन्हें रिजेक्ट करना पड़ रहा है। ऐसे मामले में रिपीट सैम्पल की रिपोर्ट भेजी जा रही है। इसकी सूचना प्रशासन व सीएमओ सभी को कई बार दी जा चुकी है।

- डॉ. वंदना उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, पैथॉलोजी विभाग, बस्ती

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