Hindi NewsUttar-pradesh NewsBasti NewsProtests Erupt Against UGC s New Rules in India
यूजीसी एक्ट के विरोध में बस्ती में प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

यूजीसी एक्ट के विरोध में बस्ती में प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

संक्षेप:

Basti News - बस्ती में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। दीपांशु सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियमों को वापस लेने की मांग की। भानपुर में अधिवक्ताओं ने भी इन नियमों को जातिगत संघर्ष का कारण बताते हुए प्रदर्शन किया। दोनों समूहों ने उच्च शिक्षा में समानता की आवश्यकता पर जोर दिया।

Jan 27, 2026 05:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बस्ती
share Share
Follow Us on

बस्ती, हिन्दुस्तान टीम। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग अब सड़कों पर उतर आई है। मंगलवार को हर्रैया तहसील क्षेत्र के सवर्ण युवाओं और छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। युवा समाजसेवी दीपांशु सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने मुरादीपुर चौराहे से जुलूस निकाला, जो पुरानी तहसील होते हुए उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। हाथों में बैनर लिए युवा ‘यूजीसी एक्ट वापस लो’ और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए चल रहे थे। भारी संख्या में युवाओं की भीड़ देखकर तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नए नियम योग्यता के बजाय जातिगत विभाजन को बढ़ावा देने वाले हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

युवाओं ने एसडीएम सत्येंद्र कुमार सिंह को चार सूत्री मांगपत्र सौंपा, जिसमें इन नियमों की समीक्षा और इन्हें निरस्त करने की मांग की गई है। एसडीएम ने युवाओं को आश्वस्त किया कि उनका ज्ञापन उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से दीपांशु सिंह, महावीर सिंह, रिंकल सिंह, हर्ष सिंह, सर्वेश मिश्र, विकास सिंह, लवकुश सिंह, राधे सिंह, गुलशन तिवारी, परमानंद द्विवेदी, सनी सिंह, राजन सिंह, प्रिंस सिंह, विजय सिंह, राहुल तिवारी, विष्णु, सौरभ, कुंवर विक्रम, सत्यम, गप्पू पांडेय, विकास, दुर्गेश, संजय तिवारी सहित काफी संख्या में युवा छात्र मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर यूजीसी के नए नियमों को लेकर भानपुर क्षेत्र में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मंगलवार को भानपुर तहसील परिसर में भगवान परशुराम सेवा सदन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने इन नियमों को सामाजिक समरसता के लिए खतरा बताते हुए एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि यूजीसी-2026 के नए प्रावधानों से समाज में जातिगत संघर्ष और वैमनस्य बढ़ेगा। अधिवक्ताओं का मुख्य विरोध प्रत्येक विवि में ‘इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर’ और ‘इक्विटी कमेटी’ के अनिवार्य गठन को लेकर है। प्रावधान के अनुसार, इन समितियों में केवल एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा, जिससे सामान्य वर्ग के छात्र और शिक्षक पूरी तरह वंचित रहेंगे। वक्ताओं ने इसे सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का हथियार बताया और कहा कि भेदभाव की परिभाषा इतनी व्यापक है कि किसी भी अकादमिक मतभेद को जातिगत आरोप का रूप दिया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने चिंता जताई कि इससे उच्च शिक्षा केंद्रों का शैक्षणिक माहौल बिगड़ेगा और युवाओं में अपनी योग्यता के प्रति हीनभावना पैदा होगी। उन्होंने शिक्षा को राजनीति और जातिगत द्वेष से मुक्त रखने की मांग की। इस दौरान राजेश त्रिपाठी, विनोद पांडेय, मनीष दुबे, उदय प्रकाश पांडेय, ध्रुवचंद पांडेय, दिलीप पांडेय सहित कई अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।