तालाब भूमि का पट्टा आवंटन निरस्त
बस्ती के उड़गइया गांव के तालाब पर चार दशक से अवैध कब्जा था। मुख्य राजस्व अधिकारी ने कब्जा हटाने का आदेश दिया, जिससे कब्जेदारों में हड़कंप मच गया। तालाब की भूमि अब सार्वजनिक उपयोग के लिए फिर से घोषित की गई है। यह आदेश भूमि के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

बस्ती। विक्रमजोत विकास खंड क्षेत्र के उड़गइया गांव के सार्वजनिक तालाब पर चार दशक से अवैध कब्जा है। मुख्य राजस्व अधिकारी बस्ती ने इनके बेदखली का आदेश दिया है। पट्टा निरस्त होने और बेदखली के आदेश से कब्जेदारों में हड़कंप मचा है। इस आदेश से सार्वजनिक भूमि तालाब आदि पर अवैध कब्जा करने वाले डरे हुए हैं। विक्रमजोत के उड़गइया गांव में गाटा संख्या 56 तालाब की सार्वजनिक भूमि के रूप मे दर्ज है। इसी तालाब की जमीन में से एक हिस्सा वर्ष 1982 से परिवार नियोजन अभियान (नसबंदी) के तहत गांव के रामचंदर को कृषि पट्टा मिला था। ग्राम पंचायत की अपील पर बस्ती के मुख्य राजस्व अधिकारी कीर्ति प्रकाश भारती ने 29 अप्रैल को फैसला सुनाया।
उड़गईया गांव निवासी राजकुमार, हनुमान, अजुज नारायण की नसबंदी के बदले जमीन और भूमिहीन होने की अपील खारिज करते हुए पट्टे की भूमि को पुन: सार्वजनिक उपयोग के लिए तालाब की भूमि घोषित की गई। उन्होंने आदेश दिया कि तालाब की भूमि धारा 132 उप्र. जवि अधिनियम और धारा 77 उप्र राजस्व संहिता के तहत सरंक्षित है, जिसका किसी को भी आवंटन नहीं किया जा सकता है।
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