जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त कराती है भागवतकथा
Basti News - बस्ती के रूपगढ़ गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ। समापन पर हवन-यज्ञ और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा वाचक पं. बलराम ने भक्ति और सत्कर्म के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि यज्ञ से आत्मिक बल मिलता है।

बस्ती, हिन्दुस्तान टीम। छावनी क्षेत्र के रूपगढ़ गांव स्थित बाबा का पुरवा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सर्वकल्याण की कामना के साथ विधिवत समापन हो गया। समापन पर हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कथा वाचक पं. बलराम ने कहा कि आत्मा को जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होता है और व्यक्ति को आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो सकता है। इससे जीव में भक्ति और ज्ञान के भाव उत्पन्न होते हैं। विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है, जो आचरण में भी झलकता है। इस दौरान रामपती देवी, लवकुश गुप्ता, श्यामलाल, सुशील, मनीराम, धर्मेंद्र, अर्जुन, विवेक मौर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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