सरकारी नाले व ताल की जमीन पर कर रहे पक्का निर्माण
बस्ती। छावनी कस्बे में राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी नाले और ताल की भूमि

बस्ती। छावनी कस्बे में राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी नाले और ताल की भूमि पर कथित रूप से पक्का निर्माण कर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दबंग किस्म के लोग कीमती सरकारी जमीन पर स्थायी निर्माण करा रहे हैं। जिस भूमि पर निर्माण कार्य हो रहा है, वह ग्राम पंचायत अभिलेखों में नाला और ताल के रूप में दर्ज बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों की चिंता
लोगों के मुताबिक करीब आठ किमी लंबे इस नाले से बरसात के मौसम में पचवस ताल, खरहटिया ताल, लखना ताल समेत आसपास के दर्जनों गांवों का पानी निकलता है। यदि नाले का मार्ग अवरुद्ध होता है तो बारिश के दौरान कई गांवों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। बताया जाता है कि शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंचे हल्का लेखपाल से निर्माण करा रहे लोगों की कहासुनी भी हुई। हल्का लेखपाल सुभाष यादव ने बताया कि जिस गाटा संख्या की भूमि का बैनामा हुआ है, उसके अतिरिक्त ताल के नाम दर्ज भूमि पर भी कब्जा किए जाने की शिकायत मिली है। मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। रामजानकी मार्ग से सटे इस नाले की जमीन पर पिछले कुछ दिनों से निर्माण कार्य जारी है। खानकला ग्राम पंचायत के प्रतापगढ़ कला क्षेत्र में ताल की भूमि पर बैनामे का दावा करते हुए कुछ लोग निर्माण करा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं निर्माण करा रहे पक्ष का कहना है कि निर्माण कार्य केवल बैनामे वाली भूमि पर कराया जा रहा है और किसी सरकारी भूमि पर कब्जा नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राम जानकी मार्ग के निर्माण के दौरान भी नाले का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था और पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में नाले पर हो रहे अतिरिक्त अतिक्रमण से बरसात में स्थिति और गंभीर हो सकती है。
जल निकासी का प्रमुख मार्ग
पचवस ताल से निकलकर रामरेखा नदी में मिलने वाला यह नाला क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बरसात के मौसम में पचवस ताल, लखना ताल, खरहटिया ताल सहित अन्य जलाशयों का अतिरिक्त पानी इसी नाले के माध्यम से रामरेखा नदी तक पहुंचता है। इस नाले से सोहगिया, अतरौरा झाम, गोपालपुर, एकमा, सौरी, पचवस, देवखर, पूरे हिन्दू, नटौवा, सरसंडा समेत लगभग दो दर्जन गांवों की जल निकासी होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाले और ताल की भूमि का सीमांकन कराकर अतिक्रमण हटाने तथा जल निकासी व्यवस्था सुरक्षित रखने की मांग की है।
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