
ब्लैक स्पॉट के पास अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर को सरकार करेगी इम्पैनल
Basti News - तालों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक मिलेगी धनराशि ओमकार पांडेय बस्ती, निज संवाददाता। सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार न
बस्ती, निज संवाददाता। सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब हाईवे पर चिह्नित हादसों के ब्लैक स्पॉट के नजदीकी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों को कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट स्क्रीम से जोड़ा जाएगा। इससे सड़क दुर्घटना में घायलों को बिना किसी औपचरिकता के तत्काल बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अपर मुख्य सचिव ने सड़क हादसों में होने वाली मृत्युदर को कम करने के लिए सड़क दुर्घटना से संबधित ब्लैक स्पॉट को चिह्नित किया जाएगा। जिले के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को मास्टर ट्रेनर के रूप में आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा।
इसके लिए जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करते हुए सीटी आरएवी के तहत एक सप्ताह में प्रशिक्षित किया जाए। शासन ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए हाईवे पर चिह्नित हादसों के ब्लैक स्पॉट के नजदीक स्थित बड़े अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों को चिह्नित कर रही है। जिससे दुर्घटना के वक्त घायलों को बिना किसी झंझट के कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा मिल सके। योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल प्रत्येक मरीजों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये लाख का मुफ्त इलाज दुर्घटना की तिथि से अगले सात दिनों तक सीटी आरएवी योजना के तहत संबंधित अस्पतालों को मिलेगा। इस बाबत सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया शासन की ओर से जारी निर्देश के बाद ब्लैक स्पॉट के पास मौजूद अस्पतालों व ट्रॉमा सेंटरों की सूची तैयार की जा रही है। उन्हें योजना में संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह ने बताया जिले में पुलिस-प्रशासन, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से चिह्नित ब्लैक स्पॉट के नजदीक अस्पतालों व ट्रामा सेंटरों को योजना से संबद्ध करने के लिए सूची बनाई जा रही है। कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट स्क्रीम से जोड़ने से घायलों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पतालों के स्टाफ को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग इम्पैनल किए गए अस्पतालों के स्टाफ को ट्रॉमा मैनेजमेंट, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, ब्लीडिंग कंट्रोल, हेड इंजरी और मल्टीपल फ्रैक्चर के त्वरित इलाज को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हादसे के बाद पहला एक घंटा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान सही व प्रभावी इलाज मिलने से जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। नोडल अधिकारी डॉ. एसबी सिंह ने बताया कि इम्पैनल किए गए अस्पतालों को एक सप्ताह का प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे गंभीर स्थिति में आए मरीजों को त्वरित इलाज में सुविधा हो। दो श्रेणियों में शामिल किए जाएंगे अस्पताल नोडल अधिकारी डॉ. एसबी सिंह ने बातया योजना के तहत अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों को दो श्रेणियों में इंपैनल किया जाएगा। पहली श्रेणी में वे अस्पताल होंगे, जहां अत्याधुनिक ट्रॉमा सुविधा, इमरजेंसी सर्जरी, आईसीयू व विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं। दूसरी श्रेणी में वे होंगे, जहां सामान्य सर्जरी व प्राथमिक इलाज की सुविधा है। योजना का लाभ दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक मिलेगा। इलाज को अस्पतालों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की राशि दी जाएगी। लगेगी निजी एंबुलेंस की मनमानी पर रोक इस योजना से हाईवे पर खड़ी रहने वाली प्राइवेट एंबुलेंस की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। कई बार हादसे के बाद घायलों को निजी एंबुलेंस अपने गठजोड़ वाले अस्पतालों में ले जाकर भर्ती करा देती हैं, जहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। अब तय इम्पैनल अस्पतालों में ही घायलों का इलाज सुनिश्चित की जाएगी। इलाज में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि इस पहल से जिले में सड़क हादसों के बाद इलाज में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा। साथ ही निजी व सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी भी तय होगी। शासन स्तर पर इस योजना की नियमित निगरानी की जाएगी। किसी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




