53 साल से साइकिल चला रहे हैं प्रधानाचार्य जगदीश मिश्र

हिन्दुस्तान, बस्ती
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बस्ती में युद्ध के हालात के चलते ईंधन संकट के बीच साइकिल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जगदीश मिश्र जैसे लोग 53 वर्षों से साइकिल चला रहे हैं, जबकि साइकिल व्यवसाय में भी तेजी आई है। अब बच्चों और बड़े लोगों के बीच साइकिल खरीदने की रुचि बढ़ी है, जिससे स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल रहा है।

53 साल से साइकिल चला रहे हैं प्रधानाचार्य जगदीश मिश्र

बस्ती, निज संवाददाता। युद्ध के हालात के चलते समूचे विश्व में ईंधन का संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्राध्यक्ष से लेकर आम नागरिक तक इससे बचने का उपाय कर रहे हैं। ऐसे में दैनिक जीवन में साइकिल का उपयोग कर बड़ी क्रांति लाई जा सकती है, जो स्वास्थ्य के साथ आर्थिक सुरक्षा का भी आधार बनेगी। इस तरह का संदेश में बस्ती में देने वाले कई लोग हैं, जो सुविधा संपन्न होने के बाद भी साइकिल से चलते हैं।

साइकिल दिवस का उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2018 में तीन जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य लोगों को साइकिल के उपयोग के प्रति जागरूक करना, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना रहा। इस संदेश को आगे बढ़ाने का काम बस्ती के जगदीश मिश्र कर रहे हैं। विद्यालय के संस्थापक प्रधानाचार्य जगदीश मिश्र बताते हैं कि उन्हें 53 साल साइकिल चलाते हो गया है। 12 साल की उम्र से साइकिल चलाने लगा। हाईस्कूल तक की पढ़ाई के दौरान प्रतिदिन 12 किमी चलाता था। इंटर में आने पर यह दूरी 12 किमी हो गई। केडीसी से स्नातक किया तो भी साइकिल नहीं छूटी। शिक्षा पूरी कर आचार्य बना तो भी यही आधार रहा और साइकिल स्वभाव में शामिल हो गया। कई विद्यालयों का सफलतापूर्वक संचालन करने वाले जगदीश मिश्र साइकिल से ही चलते हैं। उन्होंने बताया कि यह संपर्क करने व मिलने का सबसे सरल साधन है। घर से निकले, जिससे मिलना हुआ, ब्रेक लगाकर खड़ा होकर दो मिनट हालचाल ले लिया। गली कूचे में खड़ी करके अपने काम को पूरा किया जा सकता है। गाड़ियों से चलने वाले लोग इतनी सरलता से न तो सभी से मिल सकते हैं और नहीं अपना काम ही पूरा कर सकते हैं।

साइकिल व्यवसाय में बदलाव

साइकिल शोरूम संचालक विनोद सचदेवा ने बताया कि उनके परिवार में तीसरी पीढ़ी साइकिल का व्यवसाय कर रही है। पहले लुधियाना की कंपनी चार से आठ साइकिल ऑर्डर लेने के लिए आती थी। दौर बदला तो शादी विवाह के सीजन में सिफारिश पर ही साइकिल दे मिलता था। एक दौर 2000 से 2010 के बीच ऐसा आया कि लगा यह धंधा ही बंद करना पड़ेगा। लेकिन अचानक बाजार में बूम आई। यह बूम बच्चों की साइकिल खरीद के प्रति बढ़ी रूझान ने दी। अब साइकिल का अच्छा दौर चल रहा है।

बच्चों और बड़े लोगों की साइकिल की रुचि

साइकिल विक्रेता संचित सचदेवा बताते हैं कि अब बच्चे स्पोर्ट्स साइकिल खरीद रहे हैं। भले ही उनके पास गाड़ी की सुविधा है, लेकिन साइकिल का भी शौक रह रहे हैं। बड़े लोग बैट्री साइकिल की तरफ तेजी से रूझान दिखा रहे हैं। लगभग 20 हजार में आने वाली बैट्री साइकिल का स्वास्थ्य के लिहाज से लोग पैडल के सहारे चला रहे हैं। थकने पर बैट्री का यूज कर घर लौट रहे हैं। अब इसका उपयोग यात्रा के लिए भी होने लगा है। इसकी बिक्री भी बस्ती में शुरू हो गई है। सभी ब्रांडेड साइकिल कंपनियां बना रही हैं, ऐसे में साइकिल का भविष्य उज्जवल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बस्ती में साइकिल का महत्व क्या है?
बस्ती में साइकिल का उपयोग स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा का आधार बन रहा है।
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