सुबखरी में खानापूर्ति तक सिमट कर रही गई योजनाएं
Basti News - संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में गांव के विकास के लिए केन्द्र व प्रदेश
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में गांव के विकास के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार की तरफ से तमाम योजनाएं आ रही हैं। शहरों जैसी सुविधा देने के लिए प्रयास किया जा रहा है। पर नाथनगर ब्लाक के ग्राम पंचायत सुबखरी में विकास योजनाओं को संचालित करने में केवल खाना पूर्ति होने की साफ तस्वीर झलक रही है। यहां पर हर तरफ समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। गांव में जलनिकासी से लेकर हर मूलभूत सुविधा का अभाव बना हुआ है। सड़कें बदहाली का शिकार हैं। कुछ स्थानों पर लगे इंटर लॉकिंग सड़क टूट गई हैं। आज भी लोग शौच के लिए खुले में जाते हैं।

सुबखरी गांव क्षेत्रफल के हिसाब से बड़े गांव का हिस्सा है। यहां पर चकरोड और सड़कों का निर्माण व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना विकास कार्य कराने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन आज भी यहां जरूरत के हिसाब से सम्पर्क मार्ग नहीं बन सका है। गांव में बनी इंटरलॉकिंग सड़कें टूट गई हैं। आने जाने में यहां के निवासियों और बाहरी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव में जलनिकासी व्यवस्था नहीं नहीं है। इसके चलते कुछ जगहों पर घरों से निकला गंदा पानी इकट्ठा हो गया है। इससे उठती दुर्गंध लोगों को परेशान करती है। इससे मच्छर भी पनप रहे हैं। सरकारी भवनों और बड़ी योजनाएं का क्रियान्वयन नहीं हो सका। स्वच्छता अभियान के तहत बना सामुदायिक शौचालय बदहाली का शिकार हो गया है। यहां पर सुविधाएं नहीं हैं। लोग मजबूरी में शौच के लिए खुले मैदानों व सड़कों के किनारे जा रहे हैं। विद्यालय में बच्चों के पेयजल की सुविधा के लिए आरओ प्लांट लगा है पर टोंटी तक नहीं लगने से बेकार पड़ा हुआ है। गांव में युवाओं की सुविधा के लिए मनरेगा से खेल मैदान बनाने का काम शुरू किया गया पर यह अधूरा पड़ा है। इसमें पैर रखने की हिम्मत नहीं होती है। यहां के युवाओं को प्रतियोगिताओं की तैयारी में बाधा आ रही है। लोग सड़क पर खुले में अभ्यास करते हैं। सामुदायिक शौचालय की बिगड़ी सूरत स्वच्छता अभियान के तहत गांव में बने सामुदायिक शौचालय की हालत काफी खराब हो गई। यहां पर लोगों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। शौचालय में प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। देखरेख के अभाव में इसकी हालत निरंतर खण्डहर जैसी बनती जा रही है। इसका प्लास्टर अधूरा है। निर्माण के समय से ही अधूरा छोड़ दिया गया। शौचालय भवन पर लोगों को स्वच्छता का संदेश देने वाले स्लोगन व रंगाई-पुताई का अस्तित्व खत्म हो रहा है। इसके दरवाजे पर हमेशा ताला लटका रहता है। स्थानीय लोगों की माने तो अंदर की हालत काफी दयनीय बनी है। सीट टूटी है। गंदगी फैली है। सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। विद्यालय में लगा है आरओ प्लांट, पर टोंटी तक नहीं लगी परिषदीय विद्यालय परिसर में बच्चों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए योजना के तहत एक बड़ा आरओ प्लांट ग्राम पंचायत निधि से लगा दिया गया है। लेकिन अभी तक पानी की सप्लाई के लिए यहां टोटी तक नहीं लगी है। जिससे बच्चे व यहां के ग्रामीण इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। लोगों को देटी हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना में खर्च किया गया लाखों का धन बेकार साबित हो रहा है। यह केवल औचरिकता पूरी करने के लिए लगाया गया है। उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। साफ सफाई व्यवस्था बदहाल गांव की साफ सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्वच्छता अभियान के तहत यहां पर सफाई कर्मियों की तैनाती है पर वे कब आते हैं किसी को पता नहीं चलता है। हस्ताक्षर बना कर सफाई की औपचारिकता निभा कर चले जाते हैं। इसके चलते जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार अपने घरों के आस पास ही कूड़े को फेंक देते हैं। गांव में आस पास झाड़ियां उगी हुई हैं। इनकी सफाई न होने से बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। नालियां बदहाल इकट्ठा होता है गंदा पानी गांव में पानी की निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। कच्ची नालियों से पानी का बहाव होता है। इससे जगह-जगह गंदा पानी एकत्र होता रहता है। इसकी सफाई भी नहीं होती है। जब पानी निकासी एकदम से बंद हो जाती है तो ग्रामीण स्वयं सफाई करते हैं। इसके चलते इनसे दुर्गंध फैली रहती है। लोगों में जल जनित बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। अधूरा पड़ा है खेल मैदान, प्रतियोगिताओं की तैयारी में बाधा युवाओं व ग्रामीणों की सुविधा के लिए गांव-गांव खेल का मैदान बनाने की योजना चल रही है। सुखबरी गांव में भी खेल मैदान बनाने के योजना शुरू हुई। पर खेल मैदान का निर्माण शुरू होने के कुछ दिन बाद ही कार्य ठप हो गया। मैदान में ट्रैक बना ही नहीं है। मैदान परिसर में ईंट, गिट्टी बिखरी हुई है। तैयारी करने वाले युवाओं के लिए बड़ी बाधा बन गई है। तैयारी करने को कौन कहे इसमें चलना भी बड़ा मुश्किल कार्य है। लाखों खर्च के बाद भी अंत्येष्टि स्थल का उपयोग नहीं ग्राम पंचायत सुबख़री में गांव के दक्षिण तरफ कठिनईया नदी के किनारे लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया अंत्येष्टि स्थल बनाया गया है। यहां के ग्रामीण इसका उपयोग नहीं करते हैं। यह सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह गया है। देखभाल के अभाव में टिनशेड टूट गया है। अंत्येष्टि स्थल के परिसर में बड़े-बड़े झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। यहां पर विषैले सर्पो ने ठिकाना बना लिया है। परिसर में बना चेंजिंग रूम जर्जर हो गया है। यहां पर पहुंचने की राह आसान नहीं है। प्रधान प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि सरकारी योजनाओं को पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारा गया है। गांव में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं बरता गया है। गांव में कुछ पक्के कार्यों का भुगतान नहीं हुआ है। इसके चलते ये निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। धन जारी होते ही अधूरे पड़े कार्यों की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त हो जाएगी। विधायक गणेश चंद्र चौहान ने कहा कि पूरे विधान सभा क्षेत्र की समस्याओं का निदान कराया जा रहा है। सरकार द्वारा चलाई गई सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। जहां से ज्यादा समस्या आ रही है, वहां अधिकारियों से मिलकर काम कराया जा रहा है। सुबखरी गांव की जो भी समस्याएं हैं, उनका भी समाधान कराया जाएगा। ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




