Basti News: धोखाधड़ी के मामले में तीन पर केस दर्ज करने का आदेश
Basti News: सिविल जज शुभम द्विवेदी की अदालत ने पेट्रोल पंप विवाद में धोखाधड़ी और कूटरचना के मामले में एक महिला सहित तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अनीता मिश्रा ने मृत पति के नाम पर धोखाधड़ी से अनुबंध तैयार कराया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है।

Basti News: बस्ती, निज संवाददाता। सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी शुभम द्विवेदी की अदालत ने धोखाधड़ी व कूटरचना के मामले में एक महिला सहित तीन के विरुद्ध थानाध्यक्ष मुंडेरवा को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने 15 दिनों के अंदर कृत कार्रवाई से अवगत कराने के लिए भी कहा है। मुंडेरवा थानाक्षेत्र के पकड़ी चंदा गांव निवासी अजय कुमार दुबे ने अनीता मिश्रा पत्नी रविशंकर मिश्रा, विजय शंकर मिश्रा निवासी ग्राम डमरुवर थाना मेहदावल जिला संतकबीर नगर वर्तमान पता मकान नंबर ए 58 प्रगति विहार कॉलोनी, कल्याणपुर थाना गुडंबा लखनऊ व सत्यप्रकाश मिश्रा ग्राम डमरुवर थाना मेहदावल के विरुद्ध अधिवक्ता विजय त्रिपाठी के जरिए अदालत में प्रार्थना-पत्र दिया कि वह आन्जनेय पेट्रोल पंप पकड़ी चंदा का पंजीकृत स्वामी हैं।
पेट्रोल पंप के शुरुआती स्तर पर अनीता के पति रविशंकर मिश्रा से 26 लाख रुपये उधार ले लिया था। बाद में रविशंकर मिश्रा की मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता ने उधार में से 11 लाख रूपये वापस कर दिया है, शेष धनराशि देना बाकी है, जिसे देने के लिए अजय दुबे तत्पर है। इसी बीच रविशंकर की पत्नी अनीता मिश्रा ने अपने देवर विजय शंकर मिश्रा व सत्यप्रकाश मिश्र के साथ मिलकर एक कूटरचित अनुबंध सात नंबर 2024 के तिथि में लखनऊ के नोटरी वकील से तैयार कराया। जिसमें अजय का हस्ताक्षर बना हुआ है, जबकि अजय दुबे उस दिन लखनऊ गए ही नहीं थे।इस अनुबंध के आधार पर 97 लाख सात हजार रुपये बकाया बताते हुए पेट्रोल-पंप में हिस्सेदारी का फर्जी दस्तावेज तैयार कराया गया, जिसकी जानकारी होने पर अजय दुबे ने यह मुकदमा दाखिल किया। मुकदमें की जानकारी होने के बाद अनीता मिश्रा की तरफ से अधिवक्ता ने उपस्थित होकर बकाया धनराशि डेढ़ करोड़ बताया, जबकि वास्तविक लेनदेन 26 लाख रुपये का था। पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया अनुबंध पत्र संदिग्ध प्रतीत होता है। अनुबंध पत्र पर अनीता मिश्रा के हस्ताक्षर नहीं है, न ही गवाहों के हस्ताक्षर है, न ही गवाहों का नाम टाइप है। जबकि नोटरी वकील का हस्ताक्षर हैं। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते मुकदमा दर्ज कर विवेचना किये जाने का आदेश दिया है।


