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जल गई बाइक, कट गई चेचिस, फिर भी हो गया चालान

जल गई बाइक, कट गई चेचिस, फिर भी हो गया चालान

चलती बाइक में आग लगी और बाइक धू-धू कर जल गई। बाइक जलने की सूचना थानाध्यक्ष लालगंज को दी तो उन्होंने घटना को जीडी में दर्ज किया। पूरी तरह जल चुकी बाइक के नंबर का निरस्त कराने के लिए मालिक ने एआरटीओ को प्रार्थना पत्र दिया। जली गाड़ी का कटा चेचिस नियमानुसार विभाग में जमा कर दिया। छह माह तक आरटीओ में वाहन निरस्तीकरण की फाइल दौड़ती रही। अचानक पता चला कि इस गाड़ी का संतकबीरनगर में चालान हो गया है। बिना चालान शुल्क जमा किए निरस्तीकरण नहीं हो सकता है। जली हुई बाइक की कटी चेचिस विभाग के पास तो इस नंबर की गाड़ी संतकबीरनगर में कैसे चल रही है। इस सवाल का जबाब विभाग के पास भी नहीं है।

लालगंज थाने के इस्तेखार अहमद ने 18 अगस्त 2018 को लालगंज थाने में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि लालगंज-महादेवा रोड पर उसकी बाइक अचानक सुलगने लगी। वह गाड़ी खड़ा कर कूद गया और जब तक आग पर काबू करने के प्रयास करता, तब तक उसकी गाड़ी धू-धू कर जल गई। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी और गाड़ी की फोटो खींचा था। मामले को लालगंज पुलिस ने जीडी के क्रम संख्या 30 पर घटना को दर्ज भी किया।

बाइक का बीमा था। पीड़ित बीमा कंपनी के पास पहुंचा तो पता चला कि बाइक का पंजीकरण रद्द कराने के लिए कहा। बीमा कंपनी ने इस बाबत आरटीओ/एआरटीओ को 30 जनवरी 2019 को पत्र लिखकर जानकारी दी। उसके बाद बाइक मालिक इस्तेखार अहमद ने एआरटीओ बस्ती को प्रार्थना पत्र दिया। प्रार्थना पत्र के साथ जली बाइक की फोटो, आरसी, बीमा, शपथ पत्र व बाइक का कटा हुआ चेचिस का हिस्सा जमा किया। इस प्रार्थना पत्र पर पंजीकरण निरस्तीकरण का शुल्क जमा करने का आदेश हुआ। सीनियर असिस्टेंट एसजे पाल की रिपोर्ट पर इस्तेखार ने 06 अप्रैल 2019 को 100 रुपया सरेंडर शुल्क जमा कर दिया।

इस्तेखार आरटीओ आफिस का चक्कर लगाता रहा और अब 24 जून को जब निरस्तीकरण कराने पहुंचा तो पता चला कि इस बाइक का 18 जून 2019 को संतकबीरनगर में चालान हो गया है। जिसकी चालान संख्या व वाहन स्वामी का नाम विभागीय वेबसाइट पर दिख रहा है। विभाग का कहना है कि चालान का शुल्क तीन हजार रुपया है, जिसे जमा कर दें तो निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी। जली हुई बाइक, जिसका चेचिस कट चुका है और उसका चालान हो रहा है की जानकारी होने पर इस्तेखार हक्का-बक्का रह गए। उनका कहना है कि जब बाइक का वजूद ही नहीं है तो चालान कैसे हो गया। यदि इस नंबर का कोई दुरूपयोग कर रहा है तो उसकी भरपाई इस्तेखार क्यों करे। इसका जबाब उसे नहीं मिल रहा है।

कोट

‘मामला काफी गंभीर है। यदि सभी कागजात व चेचिस 18 जून के पहले कार्यालय में जमा है और गाड़ी का संतकबीरनगर में चालान हो गया। यह एक फ्राड का केस है। इसका परीक्षण कराते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डा.आरके विश्वकर्मा : आरटीओ, बस्ती संभाग

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  • Web Title:Burnt bike cut chechis still got invoices