
बस्ती में ‘एसआईटी’ करेगी कोडीन प्रकरण की जांच
Basti News - बस्ती में कोडीन प्रकरण से जुड़े नेटवर्क की जांच के लिए एसपी अभिनंदन ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। टीम में कई पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। गणपति फार्मा के जरिए कागजों में फर्जी कारोबार की जांच की जा रही है, जिसमें करोड़ों का धंधा हुआ है।
बस्ती। जिले में कोडीन प्रकरण से जुड़े नेटवर्क की जांच के लिए एसपी अभिनंदन ने विशेष जांच दल यानी ‘एसआईटी’ का गठन किया है। इसकी मॉनीटरिंग सीधे एसपी स्वयं करेंगे। एसपी स्तर से गठित एसआईटी में एसएचओ कोतवाली दिनेश चंद्र चौधरी, एसएचओ पुरानी बस्ती जयदीप दुबे के साथ एसओजी प्रभारी निरीक्षक विकास सिंह, स्वॉट प्रभारी चंदन और सर्विलांस सेल प्रभारी शेषनाथ यादव को शामिल किया गया है। एसपी अभिनंदन ने बताया कि यह टीम जिले में कोडीन से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगालेगी। आरोपितों के बैंक डिटेल को भी खंगाल कर सभी लेन-देन के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिससे जांच में सामने आए तथ्यों का मिलान कराया जा सके।
दूसरी तरफ कोतवाली में दर्ज मुकदमे में आरोपित गणपति फार्मा तीन-चार महीने से बंद है। उसके प्रोपराइटर की तलाश की जा रही है। आरोपित का सुराग लगाने के लिए टीम सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। एसआईटी टीम पुरानी बस्ती व कोतवाली में दर्ज मुकदमों की प्रगति की मॉनीटरिंग के साथ ही अवैध कारोबार में जिनकी भी संलिप्तता सामने आएगी, उस पर शिकंजा सकेगी। माना जा रहा है कि इस नेटवर्क से कुछ सफेदपोश भी सीधे तौर पर जुड़े हैं। उनकी संलिप्तता की जांच भी शुरू कर दी गई है। बस्ती में गणपति के नाम से फेक फर्म पर हुआ कारोबार बस्ती। कोडीन सिरप आपूर्ति के नाम पर जमकर कागजों में खेल हुआ। आनन-फानन में फेक फर्मों के नाम पर कारोबार होता रहा। गणपति फॉर्मा का लाइसेंस जारी कराने वाले सिंडीकेट का अब सत्यापन करने वाले अधिकारी ही नहीं तलाश कर पा रहे हैं। गणपति फॉर्मा की दुकान लाइसेंस मिलने के बाद से ही बंद रही। अब उसके मालिकान की तलाश में पुलिस और विभाग दोनों भटक रहा है। लेकिन कागजों में गणपति ने दो करोड़ के कोडीन सिरप का धंधा कर लिया। यह कोडीन सिरप जिले के छोटे दुकानदारों में बेचा जाना दिखाया गया, जिनका जीएसटी तक में रजिस्ट्रेशन नहीं था। इसके उलट जांच के सूत्र बताते हैं कि यह पूरा धंधा कागजों में हुआ। उसका एक बोतल भी मॉल बस्ती तक नहीं आया। शैली ट्रेडर्स झारखंड से जो भी माल चला, वह बस्ती तक नहीं पहुंचा। अलबत्ता कागजों में माल पहुंचा, उसका भुगतान हुआ। चार फर्मों ने गणपति फॉर्मा को करीब दो करोड़ का माल सप्लाई किया है। करीब तीन करोड़ के मॉल की आपूर्ति बस्ती की चार फर्मों ने आजमगढ़ के एएस फॉर्मा को किया। जांच के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा इसी बात का है कि यदि पांच करोड़ को न्यू फेन्सिडिल सिरप झारखंड रांची की फर्म शैली फॉर्मा से बस्ती मंगाया गया तो इसका बिल कहां पर है। यह किस ट्रांसपोर्ट से बस्ती पहुंचा। जिस ट्रांसपोर्ट से पांच करोड़ का माल बस्ती पहुंचा तो उसकी बिल्टी कहां पर है। यदि पुलिस, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, राज्य व केंद्रीय कर विभाग इस बिन्दु पर जांच करता है तो माल के ट्रांसपोर्टेशन की जानकारी हो जाएगी। यदि माल केवल कागजों में ढुलाई किया गया है तो बाहर से खरीद कर स्थानीय स्तर पर आपूर्ति करने वाली चारो फर्म इस फेक धंधे में शामिल होते हुए लाभ का हिस्सा बनीं। कागजों में माल खरीदा, ट्रांसपोर्टेशन कराया, स्थानीय स्तर पर बेचा, सभी भुगतान ऑनलाइन व चेक से किया गया और पांच करोड़ का मुनाफा घर बैठे कागजी घोड़ा दौड़ाकर हासिल कर दिया गया। इस मुनाफे से नेटवर्क से जुड़े तमाम लोग भी उपकृत हो गए, जिसका खुलासा एसआईटी जांच में होने की संभावना है।

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