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टीबी की जांच के बाद अब दवाओं का भी संकट

सज्जाद रिजवी बस्ती। टीबी मरीजों के इलाज में आ रही समस्याएं वर्ष 2025 तक

टीबी की जांच के बाद अब दवाओं का भी संकट
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,बस्तीThu, 01 Dec 2022 10:20 AM
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सज्जाद रिजवी

बस्ती। टीबी मरीजों के इलाज में आ रही समस्याएं वर्ष 2025 तक देश से टीबी के खात्में में बड़ी बाधा बन सकती है। टीबी रजिस्टेंस की जांच के बाद अब टीबी मरीज की दवाओं का संकट खड़ा हो गया है। प्रथम चरण में दी जाने वाली दवा एफडीसी जिले में समाप्त हो गई है। चार साल्ट के कम्बीनेशन से एक दवा ‘फिक्स ड्रग कॉम्बीनेशन बनाई गई है। दवा की किल्लत को देखते हुए शासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इलाज जारी रखने का निर्देश दिया है। स्थानीय अधिकारी व स्टॉफ इसे लेकर काफी परेशान हैं।

टीबी के इलाज को सुलभ बनाने के लिए दवाओं की संख्या कम की जा रही है तथा इंजेक्शन को हटा लिया गया है। टीबी मरीज को प्रथम चरण में चार साल्ट से बनी दवा एफडीसी दी जाती है। इसमें आईसोनियाजिट, रिफॉमसिन, ईथमब्युटॉल व पॉयराजीनामाईट साल्ट शामिल है। इससे मरीज को एक ही दवा में चार दवा के फायदे मिल जाते हैं। इससे पहले आने वाली दवा में पॉयराजीनाईट शामिल नहीं थी, इसे अलग से दिया जाता था।

इसे बदलकर फोर एफडीसी दवा तैयार कराई गई। दवा का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया है। जानकारों का कहना है कि मरीज को अब पुराने तरीके पर एक की जगह दो दवा देने की मजबूरी होगी। डीटीओ डॉ. एके मिश्रा का कहना है कि किसी का इलाज नहीं रुक रहा है। जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, उसका लाभ मरीजों को दिलाया जा रहा है।

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ड्रग रजिस्टेंस की जांच हो गई है ठप

टीबी मरीजों के ड्रग रजिस्टेंस की जांच की व्यवस्था टीबी क्लीनिक, मेडिकल कॉलेज, सीएचसी कुदरहा में ठप हो गई है। केवल सीएचसी हर्रैया में सीबीनॉट से जांच हो रही है। टीबी क्लीनिक की सीबीनॉट मशीन खराब पड़ी है, जबकि ट्रूनॉट मशीन की जांच का सामान नहीं है। जांच का सामान न होने से मेडिकल कॉलेज व कुदरहा की ट्रूनॉट मशीन भी बंद पड़ी है।

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