झाड़फूंक से पहले इलाज कराने आ रहे 50 फीसदी बच्चे
Bareily News - मिर्गी मानसिक बीमारी है, जिसका सही इलाज संभव है। हर साल फरवरी के दूसरे सोमवार को विश्व मिर्गी दिवस मनाया जाता है। जागरूकता अभियानों के चलते अब 50% बच्चे सीधे अस्पताल जाकर इलाज करवा रहे हैं, जबकि पहले अधिकांश झाड़फूंक में समय बर्बाद करते थे। इस साल 423 मिर्गी पीड़ित बच्चों की पहचान की गई है।

मानसिक बीमारियों में मिर्गी आम है, जिसका समय पर इलाज हो तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। हर साल विश्व मिर्गी दिवस फरवरी के दूसरे सोमवार को मनाया जाता है। मिर्गी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और अंधविश्वास के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर दिखने देने लगा है। जिले में अब मिर्गी से पीड़ित करीब 50 प्रतिशत बच्चे सीधे अस्पताल पहुंचकर इलाज करा रहे हैं, जबकि कुछ साल पहले तक अधिकांश मरीज तंत्र-मंत्र और झाड़फूंक के चक्कर में पड़े रहते थे। चार साल पहले तक मिर्गी के करीब 90 प्रतिशत मरीज इलाज से पहले झाड़फूंक में समय और पैसा बर्बाद कर रहे थे।
सही समय पर उपचार न मिलने के कारण बच्चों की स्थिति और बिगड़ जाती थी। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मिर्गी को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया। बीते चार वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की टीम धार्मिक स्थलों, मेलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगा रही है। इनके माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसका समय पर इलाज संभव है। साथ ही यह भी समझाया गया कि झाड़फूंक से मिर्गी ठीक नहीं होती, बल्कि इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। इस साल मिल चुके 423 मिर्गी पीड़ित बच्चे अब बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को सीधे अस्पतालों में दिखा रहे हैं। इस साल अब तक जिले में 423 मिर्गी पीड़ित बच्चों की पहचान की जा चुकी है, जिन्हें नियमित दवाएं और परामर्श दिया जा रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि मिर्गी के मरीजों को सामान्य जीवन जीने से रोकने वाली सामाजिक सोच में बदलाव लाना जरूरी है। जागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि शत-प्रतिशत मरीज अंधविश्वास छोड़कर समय पर सही इलाज करा सकें।
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