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अयोध्या के दीपोत्सव में होगा विंडरमेयर की रामलीला का मंचन

अयोध्या के दीपोत्सव में होगा विंडरमेयर की रामलीला का मंचन

संक्षेप:

Bareily News - विंडरमेयर की रामलीला, अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव 2025 में प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और रूस की रामलीलाएं भी शामिल होंगी। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ....

Oct 15, 2025 02:06 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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विंडरमेयर की रामलीला का मंचन अयोध्या में आयोजित होने जा रहे दीपोत्सव में भी किया जाएगा। इस आयोजन में श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और रूस की रामलीलाएं भी होंगी। देश से सिर्फ विंडरमेयर की रामलीला का चयन किया गया है। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. बृजेश्वर सिंह ने यह जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आए पत्र में डॉ. बृजेश्वर सिंह की कलात्मक उत्कृष्टता और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें और रंग विनायक रंगमंडल (विडरमेयर थिएटर) कलाकारों को अयोध्या आमंत्रित किया गया है। डॉ. बृजेश्वर सिंह ने बताया कि रंगमंडल के कलाकार 18 अक्टूबर को अयोध्या के लिए रवाना होंगे और 19 अक्टूबर को वहां दीपोत्सव 2025 के मुख्य सांस्कृतिक खण्ड में विंडरमेयर की रामलीला प्रस्तुत करेंगे।

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टीम प्रोडेक्शन मैनेजर अनुष्मा शर्मा के निर्देशन में जाएगी। डॉ. बृजेश्वर सिंह ने कहा कि यह चयन केवल विंडरमेयर के लिए ही नहीं बल्कि बरेली के प्रत्येक रंगकर्मी के लिए गौरव की बात हैं। उन्होंने बताया कि रंग विनायक रंगमंडल की टीम पूरे उत्साह के साथ तैयारी में जुट गई है। इस संगीतमयी प्रस्तुति पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म विडरमेयर की रामलीला कई राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में सर्वश्रेष्ठ चुनी गई है। हाल ही में विंडरमेयर थिएटर में इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई और अब इसे विंडरमेयर थिएटर के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। डॉ. बृजेश्वर सिंह की है परिकल्पना विडरमेयर की रामलीला की परिकल्पना दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. बृजेश्वर सिंह ने की है। मुख्य रूप से पंडित राधेश्याम कथावाचक की कृति पर आधारित इस रामलीला में रामचरित मानस और उम्मीलाल दौडियाल की पहाडी रामलीला का संगम भी मिलता है। यह एक संगीतमयी प्रस्तुति है, जिसका मंचन हर वर्ष नवरात्र के अवसर पर चिडरमेयर थिएटर में किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न शहरों में इसका मंचन होता रहा है।