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बरेली

सर्वाधिक 5 स्टार स्कूलों वाले जिले में खस्ताहाल स्कूलों से कब मिलेगी मुक्ति

हिन्दुस्तान टीम,बरेलीPublished By: Newswrap
Mon, 27 Sep 2021 03:51 AM
प्रदेश में सबसे ज्यादा 454 फाइव स्टार स्कूल वाले बरेली में नगर क्षेत्र के छात्र जर्जर स्कूलों में बैठने को मजबूर हैं। किराए की इमारतों में चल रहे...
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प्रदेश में सबसे ज्यादा 454 फाइव स्टार स्कूल वाले बरेली में नगर क्षेत्र के छात्र जर्जर स्कूलों में बैठने को मजबूर हैं। किराए की इमारतों में चल रहे...
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प्रदेश में सबसे ज्यादा 454 फाइव स्टार स्कूल वाले बरेली में नगर क्षेत्र के छात्र जर्जर स्कूलों में बैठने को मजबूर हैं। किराए की इमारतों में चल रहे...
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प्रदेश में सबसे ज्यादा 454 फाइव स्टार स्कूल वाले बरेली में नगर क्षेत्र के छात्र जर्जर स्कूलों में बैठने को मजबूर हैं। किराए की इमारतों में चल रहे स्कूलों की हालत बदतर हो चुकी है। छात्र डर के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। आए दिन किसी न किसी स्कूल में मलवा गिरता रहता है। जर्जर इमारतों के डर से तमाम छात्र तो अपना नाम भी स्कूल से कटवा चुके हैं। शिक्षक विभाग को लगातार शिकायत लिखकर दे रहे हैं मगर अभी कोई एक्शन होता नहीं दिख रहा है। इस बारे में बीएसए विनय कुमार ने बताया, देहात क्षेत्र में आपरेशन कायाकल्प से स्कूलों का सौंदर्यकरण हुआ है। शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से स्कूल संवारे जा रहे हैं। निजी क्षेत्र के सहयोग से भी स्कूल सुधरे हैं। किराए पर चल रहे जर्जर स्कूलों को भी बदलने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। फिलहाल प्रधानाध्यापकों को आदेशित किया गया है कि जर्जर कक्षों में छात्रों को नहीं बैठाएं।

स्कूल कक्ष से दिखता है आसमान

प्राइमरी स्कूल लोधी राजपूत का संचालन एक पुराने घर में हो रहा है। स्कूल के कमरे पूरी तरह से खंडहर में बदल चुके हैं। आधा लिंटर गिर हुआ है। आधा कभी भी गिर सकता है। डर के कारण छात्रों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया। अब सिर्फ 15 छात्र ही पंजीकृत हैं। वो भी कभी-कभार ही आते हैं। एक मात्र शिक्षक के रूप में यहां शिक्षामित्र गौरव पाठक को अटैच कर रखा है।

कुंवरपुर स्कूल में टपकता है पानी

सिटी स्टेशन के सामने स्थित प्राइमरी स्कूल कुंवरपुर भी जर्जर इमारत में चल रहा है। एक कक्ष में बदहाली के चलते ताला डाल दिया गया है। सिर्फ एक कमरा ही थोड़ा-बहुत सुरक्षित बचा है। इसमें भी बरसात होने पर पानी टपकता है। एक ही कक्ष में पांचों कक्षाओं के छात्र बैठने को मजबूर हैं। स्कूल में न तो बिजली है और न ही टायलेट और पानी की व्यवस्था। बच्चे अपने घरों से ही पीने का पानी लेकर आते हैं। स्कूल में कुल 53 छात्र पंजीकृत हैं।

जोगी नवादा स्कूल में रोज गिरता प्लास्टर

कभी शहर के प्रमुख स्कूलों में शुमार यूपीएस जोगी नवादा का हाल भी खराब है। स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी है। कक्षाओं की छत पर नजर डालते ही डर लगने लगता है। छात्र ऐसे ही डरावने माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। गुरुवार को भी लिंटर से प्लास्टर का टुकड़ा अचानक ही गिर पड़ा। शुक्र रहा कि उस वक्त कोई छात्र या स्टाफ का सदस्य उसकी जद में नहीं आया।

कोहाड़ापीर में भी गिरता रहता प्लास्टर

प्राइमरी स्कूल कोहाड़ापीर में ही नगर संसाधन केंद्र का भी संचालन होता है। उसके बाद भी यहां की इमारत पूरी तरह से दुरुस्त नहीं है। कंप्यूटर कक्ष की हालत तो बहुत ही ज्यादा खराब है। हालांकि इसमें बच्चे नहीं बैठते हैं मगर स्टाफ यहां ही काम करता है। कक्षा कक्ष भी सही नहीं है। लिंटर से अक्सर पपड़ी छूट-छूट कर गिरती रहती है। यदि जल्द ही इसकी मरम्मत नहीं हुई तो हालात और भी ज्यादा खराब हो जाएंगे।

कालीबाड़ी में बस दो कमरे ही बचे

नगर निगम के अंदर चलने वाले कालीबाड़ी स्कूल की हालत भी किसी से छुपी नहीं है। नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय टूट जाने के कारण स्कूल का एक कक्ष कार्यालय के नाम हो गया है। बचे हुए दो कक्षों में छात्र बैठते हैं। दोनों कक्ष का पिछले दिनों रिनोवेशन कराया गया था। नए टाइल्स भी लगाए गए। अंदर से कमरे तो सही हो गए हैं मगर अभी भी इमारत बाहर से जर्जर ही है।

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