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उत्तर प्रदेश में बेटियों के एडमिशन में पांच फीसदी से ज्यादा उछाल

उत्तर प्रदेश में बेटियों के एडमिशन में पांच फीसदी से ज्यादा उछाल

संक्षेप:

Bareily News - उत्तर प्रदेश में बेटियों के एडमिशन में पांच फीसदी से ज्यादा की उछाल फ़ोटो दीप तिवारी पड़ताल - वर्ष 2020-21 की तुलना में 2024-25 में लड़कियों के नामांकन

Feb 10, 2026 02:04 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं का प्रदेश में बड़ा असर नजर आ रहा है। यू डाइस प्लस पोर्टल के ताजे आंकड़ों को देखा जाए तो बीते चार वर्षों में प्रदेश में प्रवेश लेने वाली बेटियों की संख्या करीब 12 लाख (5.1 प्रतिशत) बढ़ गई है। बरेली जिले की बात की जाए तो यहां बीते चार वर्षों में बेटियों का नामांकन लगभग 10 फीसदी बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये की सहायता), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं (प्री-मैट्रिक/पोस्ट-मैट्रिक) प्रमुखता से चल रही हैं।

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ये योजनाएं शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, स्वास्थ्य और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करती हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के उच्चीकरण से भी बड़ा बदलाव हो रहा है। इसके चलते स्कूलों में लड़कियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 12 तक कुल 2,33,14,943 लड़कियों का नामांकन था। बीते दिनों जारी सत्र 2024-25 की यू डाइस रिपोर्ट के अनुसार अब उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की संख्या 2.45 करोड़ हो गई है। इस तरह से बीते 5 वर्षों में लगभग 12 लाख से अधिक छात्राएं बढ़ गई। जबकि लड़कों के नामांकन में केवल चार लाख की वृद्धि ही हुई है। सत्र 2020-21 में 2.38 करोड़ छात्र स्कूलों में पढ़ रहे थे। सत्र 2024 25 में इनकी संख्या 2.42 करोड़ हो गई है। लड़कों से ज्यादा लड़कियों का प्रवेश वर्ष 2020-21 में लड़कों का नामांकन लड़कियों से अधिक था। तब 2.38 लड़कों के मुकाबले 2.33 करोड़ लड़कियां रजिस्टर्ड थी। लेकिन 2024-25 के आंकड़ों में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। अब 2.42 करोड़ लड़कों के मुकाबले 2.45 करोड़ लड़कियां पढ़ रही हैं। यह उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव है। बरेली जिले में 10 फीसदी की वृद्धि बरेली जिले में वर्ष 2020-21 की तुलना में वर्ष 2024-25 में लड़कियों के नामांकन में करीब 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 की 3,28,412 छात्राओं के मुकाबले 2024-25 में 3,61,285 ने इंटर तक के स्कूलों में प्रवेश लिया। सुनिए इनकीं बात डीबीटी, निशुल्क शिक्षा से बदलाव ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे रबीअ बहार कहते हैं, नामांकन में वृद्धि मुख्य रूप से सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में हुई है, जहां लड़कियों को डीबीटी, फ्री किताबें, मिड डे मील आदि योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। उच्च माध्यमिक स्तर में बड़ा बदलाव राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र मौर्य कहते हैं, सबसे बड़ा बदलाव कक्षा 11 और 12 में देखा गया है, जहां लड़कियों का नामांकन 21.14 फीसदी बढ़ा है। यह दर्शाता है कि लड़कियां स्कूली शिक्षा पूरी करने को प्रतिबद्ध हैं। ड्रॉप आउट की समस्या पर काफी काबू अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना कहते हैं, माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) में लड़कियों की 9.45 फ़ीसदी की वृद्धि दर यह बताती है कि ड्रॉप-आउट की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया गया है। सामाजिक बदलाव इसका एक बहुत बड़ा कारण है। पूरे प्रदेश के साथ बरेली जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता, विशेषकर बालिकाओं के लिए, तेजी से बढ़ी है। सरकारी स्कूलों में बढ़ती सुविधाएं, कस्तूरबा स्कूलों का उच्चीकरण, सामाजिक जागरूकता, कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं से लड़कियों की भागीदारी हर स्तर पर छलांग लगा रही है। - डॉ. अजीत कुमार, एडी बेसिक बरेली मंडल