बच्चों में दिव्यांगता की जल्द पहचान जरूरी : डॉ. अमिताव
जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान द्वारा आईएमए सभागार में दो दिवसीय सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम शुरू हुआ। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान और हस्तक्षेप पर केंद्रित था। कार्यक्रम में 50 विशेष शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और नई जानकारियों को साझा किया।

जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान की ओर से शनिवार को आईएमए सभागार में दो दिवसीय सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम आरंभ हुआ। कार्यशाला का विषय विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान और हस्तक्षेप रहा।
संस्थान के अध्यक्ष प्रो. अमिताव मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि जैसे डॉक्टरों के लिए सीएमई जरूरी है, वैसे ही दिव्यांगता क्षेत्र के विशेषज्ञों को नई जानकारियों से अपडेट रहने के लिए सीआरई आवश्यक है। अभिनव कुमार, अर्शी मिर्जा, सीकन कुमार, पल्लवी सिंह और फुरकाना नाज ने विभिन्न मॉडल्स व चुनौतियों पर प्रकाश डाला। संस्थान के प्रशासक हर्ष चौहान ने बताया कि कार्यशाला में बरेली मंडल के 50 विशेष शिक्षकों व विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
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