DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Happy Raksha Bandhan 2019 : भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व कल, जानिए शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन का पर्व रक्षा एवं स्नेह का प्रतीक उत्सव है। जो व्यक्ति रक्षा सूत्र बंधवाता है, वह बांधने वाले की रक्षा का सदैव प्रण लेता है। इस पर्व को श्रावणी पूर्णिमा अथवा नारियल पूर्णिमा भी कहते है। भविष्यपुराण के अनुसार देवता एवं दानवों के बीच युद्द में दानवों का पलड़ा भारी होने से भगवान इंद्र घबराकर देवताओं के गुरु ब्रस्पतिदेव के पास गए। वहां बैठी इंद्र की पत्नी इंद्राणी अपने पति का वृतान्त सुन रहीं थीं। उन्होंने रेशम का धागा अपने मंत्रों की शक्ति से पवित्र करके विजय की कामना करते हुए अपने पति के हाथ पर बांध दिया। वह श्रावण पूर्णिमा का ही दिन था। इंद्र इस युद्ध में विजयी हुए। तब से ही श्रावण पूर्णिमा के दिन यह परंपरा चली आ रही है।

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 15 अगस्त गुरुवार को को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। बालाजी ज्योतिष संस्थान के पं. राजीव शर्मा ने बताया कि पूर्णिमा को जिस मास में श्रवण नक्षत्र होता है, वही श्रावण मास कहलाता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर बनने वाला ध्वज योग विशेष है। इसके साथ ही सौभाग्य योग और सिद्ध योग भी विशिष्ट है। इस दिन पूर्णिमा तिथि का आरम्भ दोपहर 3:46 (14 अगस्त) और समाप्ति 15 अगस्त को शाम 5:59 बजे है। इस वर्ष मुहूर्त काल में भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। राखी बांधने का विशेष मुहूर्त सुबह 5:54 से 7:31 बजे तक और दोपहर 12:24 से 2:02 बजे तक है।

इस विधि से करें व्रत

व्रत में प्रात: देवता, पितर तथा ऋषियों का तर्पण करें। दोपहर के समय ऊनी, सूती या रेशमी पीत वस्त्र लेकर उसमें सरसों, केसर, चंदन, अक्षत रखकर बांध लें। फिर कलश स्थापना कर उस पर रक्षा सूत्र रखकर उसका यथाविधि पूजन करें। ब्राह्मण से रक्षा सूत्र को दाहिने हाथ में बंधबाना चाहिये। सामान्य परम्परा के अनुसार रक्षा बंधन के दिन बहन भाई को तिलक लगाकर हांथ में नारियल, रुमाल आदि रखकर, राखी बांधकर मिष्ठान खिलाकर मुँह मीठा करती हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:tomorrow festival of raksha bandhan in bareilly