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22 सितम्बर, 2020|6:58|IST

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दस वर्ष में सबसे कम गर्मी पड़ी इस अप्रैल में

दस वर्ष में सबसे कम गर्मी पड़ी इस अप्रैल में

लॉकडाउन में लोग घरों में कैद हुए तो प्रदूषण का स्तर कम होने लगा। फैक्ट्रियों-कार्यालयों में तालाबंदी, वाहनों के न चलने से इस बार पिछले दस सालों के मुकाबले अप्रैल में सबसे कम गर्मी पड़ी। इस बार अप्रैल में एक भी दिन तापमान 40 डिग्री तक नहीं पहुंचा। 60.1 मिमी बरसात भी हुई।

पिछले दस वर्षों में अप्रैल के महीने से ही गर्मी सितम करना शुरू कर देती थी। भीषण धूप के चलते लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता था। सुबह सात बजे से ही धूप इतनी तल्ख होती थी कि दोपहर का अहसास होने लगता था। दोपहर एक बजे से लेकर शाम पांच बजे तक हालात बिल्कुल भट्टी जैसे होते थे। इस बार हालात बिल्कुल इतर रहे। अधिकतर कार्यालय और कल-कारखाने बंद हैं। ऑफिस से लेकर घरों तक एसी नहीं चल रहे। तमाम लोग तो पंखे भी नहीं चला रहे। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी 10 फीसदी ही रह गई है। इस कारण पूरे महीने तापमान 35 डिग्री के आसपास झूलता रहा।

पिछले साल टूटा था गर्मी का रिकॉर्ड : पिछले साल अप्रैल के आखिरी दिन गर्मी ने पिछले दस वर्षों के रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया था। 30 मार्च को अधिकतम तापमान 43 डिग्री तक पहुंच गया था। इस बार अधिकतम तापमान 15 अप्रैल को 38.1 डिग्री दर्ज किया गया। 15 अप्रैल के बाद लगातार बारिश होने से तापमान नीचे गिरता चला गया। पूरे महीने में रिकॉर्डतोड़ 60.1 मिमी बारिश हुई।

मई के अंतिम हफ्ते में 40 पार होगा तापमान : मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगर लॉकडाउन और बढ़ा और इसी तरह से हालात रहे तो तापमान मई के अंतिम या जून के पहले हफ्ते में 42 डिग्री तक जाएगा। इससे लोगों को गर्मी से राहत रहेगी।

इस हफ्ते में भी बारिश की संभावना : मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह बताते हैं कि मौसम पर लॉकडाउन का साफ असर दिख रहा है। जीवन शैली में बदलाव से तापमान कम बढ़ा है। इस बार अप्रैल के महीने में पश्चिमी विक्षोभ भी काफी सक्रिय रहा है। अब मई के पहले हफ्ते में भी लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने की प्रबल संभावना है।

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  • Web Title:This April was the lowest summer in ten years