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बरेली

राशन की दुकानों जैसी टाकीज में लगती थी भीड़

हिन्दुस्तान टीम,बरेलीPublished By: Newswrap
Thu, 08 Jul 2021 03:40 AM
दिलीप कुमार का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि उन्हें सिनेमाघरों में देखने के लिए भीड़ टूट पड़ती...
1 / 2दिलीप कुमार का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि उन्हें सिनेमाघरों में देखने के लिए भीड़ टूट पड़ती...
दिलीप कुमार का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि उन्हें सिनेमाघरों में देखने के लिए भीड़ टूट पड़ती...
2 / 2दिलीप कुमार का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि उन्हें सिनेमाघरों में देखने के लिए भीड़ टूट पड़ती...

दिलीप कुमार का अंदाज ही कुछ ऐसा था कि उन्हें सिनेमाघरों में देखने के लिए भीड़ टूट पड़ती थी। बरेली के सिनेमाघरों में उनकी फिल्मों के टिकट लेने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ती थी जैसे राशन की दुकानों पर भीड़ लगी हो। उनकी फिल्में दो-दो साल तक सिनेमाघरों में लगी रही। आज भी लोगों को उनके क्लासिक अंदाज की यादें ताजा हैं।

डेढ़ वर्ष तक जगत में चली थी मुगल-ए-आजम

रामपुर गार्डन निवासी सतीश चंद्रा बताते हैं कि मुगल-ए-आजम की रिलीजिंग के समय मेरी उम्र 10 वर्ष थी। मैंने अपने पिता मजिस्ट्रेट कुंवर भुवन चंद्र और मां रानी शांति लता के साथ यह फिल्म देखी थी। मुझे उसके बारे में सब कुछ याद है। रिलीज से पहले ही फिल्म जबरदस्त हाइप थी। सुना था कि फिल्म में दिलीप कुमार की हेयर स्टाइल सेट करने के लिए इंग्लैंड से हेयर ड्रेसर आए थे। जगत टाकीज में फिल्म लगभग डेढ़ वर्ष तक चली।

ब्लैक में बिकते थे फिल्मों के टिकट

दिलीप कुमार की बड़ी प्रशंसकों में शामिल अमला शर्मा बताती है कि उनकी फिल्मों के टिकट ब्लैक में बिकते थे। इससे पहले और किसी अभिनेता के लिए ऐसी मारामारी नजर नहीं आई। मधुमति, देवदास, मुगले आजम, नया दौर, क्रांति, विधाता सभी का यही हाल था। मधुमति उनकी क्लासिक मूवी रही। उसका एक-एक दृश्य आज भी मेरी आँखों में बसा हुआ है। ईरान में भी उनकी फिल्में देखने को भीड़ उमड़ पड़ती थी।

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