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दम तोड़ती नदियों को फिर दी जाएगी जांच नाम की 'ऑक्सीजन'

दम तोड़ती नदियों को फिर दी जाएगी जांच नाम की 'ऑक्सीजन'

दम तोड़ती नदियों को फिर से जांच नाम की ऑक्सीजन देने की तैयारी है। पांच साल तक कागजों पर ही काम हुआ। तमाम सैंपलिंग की गई। कार्य योजनाएं बनाई गईं। नदियों की जांच को लखनऊ से दिल्ली तक की कई टीमें आईं। जहां-तहां से नदियों से पानी का सैंपल लिया गया। नतीजा कुछ नहीं निकला। सुना है, अब फिर से सरकार नदियों के संरक्षण को लेकर सख्त हो गई है। फिर से नमामि गंगे के तहत कार्रवाई शुरू होगी। पता नहीं इस बार भी नदियों के संरक्षण की योजना किस मुकाम तक पहुंचती है। क्या पिछली बार की तरह ही जांच नाम की ऑक्सीजन नदियों को दी जाएगी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, बरेली में नकटिया, किला और देवरनिया नदी प्रमुख नदियों में से हैं। यह नदियां कभी रुहेलखंड की शान थीं। किसानों के लिए बहुत पूर्ण थीं। यहां कभी मेला लगते थे, लेकिन बढ़ती आबादी और गंदगी ने नदियों का दम घोट दिया है। पांच साल पहले भाजपा सरकार बनी तो नमामि गंगे योजना का शुभारंभ हुआ। पहले चरण में रामगंगा की सफाई को लेकर काम हुआ। फिर सहायक नदियों को लेकर कवायद शुरू की गई थी। नदियों में गंदगी को देखते हुए एनजीटी भी सख्त हुआ। इसके बाद बरेली में नदियों को बचाने के लिए अफसरों ने दौड़भाग शुरू की। तीन-चार महीने में एक बार टीम बरेली आती थी। औपचारिकता के नाम पर जांच पड़ताल करती। नटकिया, किला और देवरनिया नदी से सैंपल लिये गए। तीन-चार सालों में 10-12 सैंपल भरकर टीम ले गई। सिर्फ सैंपल ही भरे गए। आगे कुछ नहीं हुआ। नदियां जिस हालात में थीं, वैसी ही हैं। सुना जा रहा है, दुबारा से भाजपा की सरकार आई तो फिर से नदियों के संरक्षण की कवायद तेज हो रही है। आगे भी क्या वहीं जांच नाम की ऑक्सीजन नदियों को दी जाएगी। कागजों पर ही रिपोर्ट बनेगी और सुरक्षित रख ली जाएगी।

नदियों से हटाए जाएं अवैध कब्जे : प्रशासन को सबसे पहले चाहिए कि नदियों पर जो अवैध कब्जे हैं उनको हटाया जाए। नदियों की साफ-सफाई हो। सफाई के बाद उन नदियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाए। जिससे उनमें पानी की कमी न रहे, कभी सूखें न। उनकी धारा चलती रहे। अब यह नदियां नहीं हैं। पोखर का रूप ले लिया है। जहां-तहां नालों का पानी भरता है। वहां पर दल-दल बन गया है। काफी जगह तो किसानों और विल्डरों ने नदियों पर कब्जे भी कर लिये हैं। नालों का पानी इन नदियों से होकर रामगंगा में गिरता है। अगर यही हालात रहे तो एक दिन इन नदियों की तरह ही रामगंगा की अविरल धारा पर भी संकट छा जाएगा। बढ़ती गंदगी से रामगंगा का भी दम घुटने लगेगा।

जिंदा की जा सकती है नदियां : नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों से हर रोज लाखों लीटर गंदा पानी निकलता है। अगर बरेली शहर की बात की जाए तो करीब 500 मिलियन लीटर गंदा पानी नालों के माध्यम से किला और नकटिया नदी में पहुंचता है। यहां से रामगंगा में गिरता है। इसी तरह से प्रतिदिन नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं का भी गंदा पानी इन नदियों में आता है। उद्योगों से भी केमिकल युक्त पानी इन्हीं नदियों में जाता है। यही वजह है जो नदियां दम तोड़ गईं। पानी में रहने वालों जीवों का जीवन भी संकट में है।

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  • Web Title:The river will be repaired the name of the oxygen probe