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2 अगस्त, 2020|9:55|IST

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जिंक और पोटाश लो तभी मिलेगी यूरिया

जिंक और पोटाश लो तभी मिलेगी यूरिया

जिले में यूरिया की कालाबाजारी का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि कमी का हवाला देते हुए ज्यादा दाम लेने के बावजूद जिंक, पोटाश और पेस्टिसाइड खरीदने को बाध्य किया जा रहा है। हैरत की बात है एक ओर कृषि अधिकारी यूरिया की कमी न होने का दावा कर रहे हैं, दूसरी ओर सहकारी समितियों पर घंटों लाइन में लगने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही।

इन दिनों धान की तैयार फसल में यूरिया की जरूरत है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान सहकारी समितियों और खाद, बीज की दुकानों पर उमड़ रहे हैं। इस साल किसानों में फैली लॉकडाउन की अफवाह से किसान ज्यादा से ज्यादा स्टॉक पहले ही कर लेना चाह रहे हैं। जिस बजह से डिमांड में भी एकदम से उछाल आ गया है। बढ़ी मांग से आपूर्ति में हो रही दिक्कत का फायदा उठाने के लिए बड़ी संख्या में मुनाफाखोर भी सक्रिय हो गए हैं। किसानों का आरोप है कि यूरिया के बदले जिंक, कैल्शियम खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। मना करने के विक्रेता ऊपर से दवाब बताकर इसे बेचना मजबूरी बता रहे हैं। चूंकि सहकारी समितियों पर घंटो लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आ रहा। ऐसे में किसानों के सामने विक्रेताओं की बात मानने के अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं है। गुलरिया गांव के किसान सोमपाल, बाबूराम मकरंदपुर के रामकुमार दियोरनिया के जगदीश शरण दुष्यंत ने यूरिया न मिलने की शिकायत की।

पिछले साल से डेढ़ गुना हुई खपत

मानसून के सीजन में हुई अच्छी बारिश का असर भी भी यूरिया की खपत पर नजर आ रहा है। जिले में अब तक पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना यूरिया की बिक्री हो चुकी है। इसके बावजूद लगातार मांग बढ़ती जा रही है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की माने तो पूरे जुलाई माह हुई बारिश से जिले में धान का रकबा बढ़ा है। इसके साथ ही इस साल रोपाई भी समय पर पूरी हो गई। यही बजह है कि यूरिया की मांग में उछाल आया है। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि मांग की तुलना में पर्याप्त भंडार मौजूद है। प्रीपोजिशनिंग (समय से पूर्व भंडारण) और मासिक आवंटन के तहत प्राप्त यूरिया मौजूद होने से किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

मांग के अनुसार पर्याप्त संख्या में यूरिया का भंडारण है। जो विक्रेता जबरन जिंक, पोटाश की बिक्री कर रहे हैं उनके खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पिछले दिनों दो विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित भी किए गए हैं।

- धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला कृषि अधिकारी

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  • Web Title:Take zinc and potash only if urea is available