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गरीब किसान की व्यथा की कहता सवा सेर गेहूं

गरीब किसान की व्यथा की कहता सवा सेर गेहूं

संजय कम्यूनिटी हाल में चल रहे बरेली नाट्स समारोह में रविवार को मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी सवा सेर गेहूं का मंचन हुआ। एक किसान की गरीबी और विप्र के जुल्म की कहानी है सवा सेर गेहूं। किसान ने विप्र से महज सवा सेर गेहूं उधार लिया था और कुछ सालों बाद ही वह उधार उसके जी का जंजाल बन गया। किसान मजदूर बन गया और विप्र एक साहूकार।

मंच पर कलाकारों का सधा अभिनय और संवाद अदायगी दर्शकों को खूब पसंद आई।नाटक का मुख्य किरदार शंकर किसान है। घर आए मेहमान की खातिरदारी के लिए उसने विप्र महाराज से सवा सेर गेहूं उधार लिया था। बदले में शंकर ने डेढ़ पंसेरी गेहूं दे दिया और सोचा कि ऋण चुकता हो गया। सरल मन शंकर यहीं धोखा खा गया था और सात साल गुजरने के बाद विप्र ने बताया कि उधार साढ़े पांच मन गेहूं हो गया है।

सुनकर शंकर घबरा गया। वह समझ गया कि सवा सेर गेहूं उसका सबकुछ छीन लेगा। यही कथानक का सारांश है। नाटक के सूत्रधार रंजीत वालिया और सचेतक जेसी पालीवाल रहे। नाटक में अमित कक्कड़, सुनील धवन, मो. आरिफ, राजीव, वेदांत ने प्रमुख भूमिका निभाई। रूपसज्जा बीएस सक्सेना, प्रकाश देवेंद्र रावत, संगीत हरजीत कौर का रहा। कार्यक्रम में प्रबंधन में रामकृष्ण शुक्ल समेत अन्य का योगदान रहा।

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  • Web Title:staged the drama munshi prem chandra on sanjay comunity hall