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शाहजहांपुर की इस छात्रा की स्टोन आर्ट के यूपी से केरल तक लोग दीवाने, जानिए क्या है खास बात

शाहजहांपुर की इस छात्रा की स्टोन आर्ट के यूपी से केरल तक लोग दीवाने, जानिए क्या है खास बात

संक्षेप:

Bareily News - इस छात्रा की स्टोन आर्ट के यूपी से केरल तक लोग दीवाने, जानिए क्या है खास बात

Sun, 30 Nov 2025 08:23 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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विशाल आनंद, शाहजहांपुर। शाहजहांपुर की सोमना पांडेय इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी अनोखी कला के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। साधारण दिखने वाले पत्थरों को वाटरप्रूफ आर्ट पीस में बदलने की उनकी प्रतिभा ने न सिर्फ उन्हें पहचान दिलाई, बल्कि एक नए करियर की तरफ बढ़ा दिया है। यूपी से केरल तक उनके बनाये आर्ट पीस की मांग है। जेल रोड पर रहने वाली सोमना एसएस कॉलेज में बीसीए की छात्रा हैं। पेंटिंग का उन्हें बचपन से शौक था। पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक बार पत्थरों को कलर किया तो हर किसी ने उनकी तारीफ की। यहीं से सोमना के दिमाग में आया कि क्यों न इस शौक को विस्तार दिया जाए।

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सोमना ने प्राकृतिक पत्थरों को साफ कर, घिसकर, आकार देकर और अपने खास प्रोसेस से तैयार करना शुरू किया। वो उन पर पेंटिंग, स्केचिंग और कलरवर्क करके ऐसा आर्टिकल तैयार करती हैं, जिसे पानी, धूप या नमी नुकसान नहीं पहुँचा सकती। सोमना ने यह डेकोरेटिव शोपीस, कस्टमाइज्ड पेपर वेट, स्टोन लैम्प आर्ट, एक्वेरियम डेकोर स्टोन्स, होम डेकोरेशन स्टोन सेट्स के फ़ोटो फेसबुक, इंस्टाग्राम पर डाले तो लोग इनके दीवाने हो गए। देश भर से मिल रही है तारीफ खास बात यह है कि सोमना का हर पीस एकदम यूनिक होता है। यही कारण है कि सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में उनकी कला की मांग बढ़ रही है। दिल्ली, उत्तराखंड और पंजाब के बाद अब उनके पास ओड़िशा, महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश और गुजरात से भी ऑर्डर आने लगे हैं। घर बैठे ऑनलाइन बिजनेस मॉडल से बनाई पहचान सोमना ने अपना पूरा काम ऑनलाइन बिजनेस मॉडल पर तैयार किया है। वह ऑर्डर इंस्टाग्राम और फेसबुक के ज़रिए लेती हैं। पेमेंट ऑनलाइन। पैकिंग घर पर और डिलीवरी कुरियर माध्यम से करतीं हैं। महज एक स्मार्टफोन और कला ने उन्हें ऐसा प्लेटफ़ॉर्म दिया जहां से वह देशभर में अपने क्रिएशन भेज रही हैं। डिजिटल इंडिया का यह मॉडल तमाम युवाओं के लिए मिसाल है। पत्थर को देखती कैनवस की तरह सोमना कहती हैं कि कला मुझे प्रकृति से मिली है। लोग पत्थर को पत्थर समझते हैं और मैं उसे एक कैनवस की तरह देखती हूं। उनकी यही सोच आज उन्हें नई पहचान दे रही है।