ये क्या हो रहा रुहेलखंड विश्वविद्यालय में : यहां PUBG खेलने को लेकर सीनियर-जूनियर भिड़े

Dinesh Rathour प्रमुख संवाददाता, बरेली
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऑनलाइन पब्जी गेम खेलने को दबाव बनाने पर सीनियर और जूनियर विद्यार्थियों में पंगा हो गया। इस बीच किसी ने रैंगिग का शोर मचा दिया तो प्रॉक्टर व स्टाफ मौके पर पहुंचा। छात्रों को...

ये क्या हो रहा रुहेलखंड विश्वविद्यालय में : यहां PUBG खेलने को लेकर सीनियर-जूनियर भिड़े

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऑनलाइन पब्जी गेम खेलने को दबाव बनाने पर सीनियर और जूनियर विद्यार्थियों में पंगा हो गया। इस बीच किसी ने रैंगिग का शोर मचा दिया तो प्रॉक्टर व स्टाफ मौके पर पहुंचा। छात्रों को तितर-बितर कर हटाया। हालांकि, पूछताछ में छात्रों ने रैंगिंग की बात से इंकार किया। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के न्यू बॉयज हॉस्टल में जूनियर छात्र रहते हैं। मेन्स हॉस्टल में सीनियर छात्र रहते हैं। दोनों हॉस्टल आसपास होने के कारण अक्सर रैंगिंग को लेकर बखेड़ा आम बात है। शनिवार दोपहर बाद सीनियर छात्र और जूनियर छात्र न्यू बॉयज हॉस्टल के सामने बड़े बने हेलीपैड पर इकट्ठा थे। इस दौरान कुछ छात्र क्रिकेट खेल रहे थे। कुछ ऑनलाइन गेम पब्जी खेलने में मशगूल थे।

पब्जी खेलने को लेकर जबर्दस्ती करने को लेकर जूनियर-सीनियर छात्रों में विवाद हो गया। इस बीच किसी ने वार्डन और हॉस्टल प्रॉक्टर को रैगिंग की सूचना दे दी। इस पर न्यू बॉयज हॉस्टल के वार्डन प्रोफेसर विजय बहादुर सिंह यादव और मेन्स हॉस्टल के प्रॉक्टर जेएन मौर्य मौके पर पहुंचे जहां दोनों गुटों के छात्र इकट्ठा थे। पूछताछ में पता चला कि सारा विवाद पब्जी गेम खेलने को लेकर हुआ था। सीनियर छात्र गेम खेलने के लिए जूनियर छात्रों को जबरदस्ती अपने साथ लेकर गए थे। हालांकि विवाद बढ़ता देख जूनियर और सीनियर छात्र दोनों रैगिंग से मुकर गए। कहा कि वे तो बस क्रिकेट खेल रहे थे। जूनियर और सीनियर छात्रों को एक जगह इकट्ठा होने से नाराज न्यू बॉयज हॉस्टल के वार्डन प्रोफेसर विजय बहादुर सिंह यादव ने कड़ी चेतावनी जारी की। कहा कि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा होने पर छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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जूनियर और सीनियर छात्र दोनों हेलीपैड पर इकट्ठा थे रैगिंग की सूचना पर वह मौके पर पहुंचे तो पता चला कि जूनियर और सीनियर छात्र सद्भावना क्रिकेट मैच खेल रहे थे। रैगिंग की बात सही नहीं पाई गई। कड़ी चेतावनी जारी कर जूनियर और सीनियर छात्रों को इकट्ठा होने से मना किया गया है।

प्रो विजय बहादुर सिंह यादव, वार्डन न्यू बॉयज हॉस्टल

किसी ने बताया कि जूनियर और सीनियर छात्र कोई ऑनलाइन गेम खेल रहे थे। विवाद की सूचना पर मौके पर पहुंचे तो पता चला कि वह क्रिकेट खेल रहे हैं। जूनियर और सीनियर छात्र दोनों को हिदायत दी गई है कि वे दोबारा इस तरह इकट्ठा न हों। इससे विवि परिसर में माहौल खराब होता है। सख्ती से पेश आया जाएगा।

प्रो जे एन मौर्या, प्रॉक्टर मेंस हॉस्टल

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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