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बरेलीघर में पड़े फांके तो सहारा बना बेटी के स्कूल का 'बैतुलमाल'

हिन्दुस्तान टीम,बरेलीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:31 AM
घर में पड़े फांके तो सहारा बना बेटी के स्कूल का 'बैतुलमाल'

कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझते लोगों के लिए उनकी बेटी के स्कूल का 'बैतुलमाल' बड़ा सहारा साबित हुआ। इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज में बैतुलमाल (धन का सदन) के रूप में दान पेटी लगी है। इस के पैसों से पिछले कोरोना काल में 350 छात्राओं की फीस जमा की गई थी। इस बार भी तमाम अभिभावकों को मदद उपलब्ध कराई गई है।

वर्ष 2010 में चमन जहां इस्लामिया कालेज की प्रधानाचार्या बनी थी। इस स्कूल में बड़ी संख्या में गरीब छात्राएं पढ़ती हैं। उनके सामने अक्सर फीस जमा करने, ड्रेस-जूते आदि खरीदने की समस्या रहती थी। अक्सर अभिभावक पैसों की कमी के चलते अपना और अपने बच्चों का इलाज भी नहीं करवा पाते थे। वर्ष 2011 के पवित्र रमजान के महीने में चमन जहां ने स्कूल में बैतुलमाल (धन का सदन) स्थापित किया। सबसे पहले उन्होंने अपने पास से इसमें पैसे डालने शुरू किए। उन से प्रेरित होकर स्टाफ के अन्य सदस्य भी दान करने लगे। बैतुलमाल से जो भी पैसा निकलता है, वो समय-समय पर गरीब छात्राओं में वितरित कर दिया जाता है। उनकी फीस भी जमा की जाती है।

कोरोना काल में मिसाल बना बैतुलमाल

कोरोना के चलते तमाम अभिभावकों के काम-धंधे बंद हो गए। घर पर रोजी-रोटी का भी संकट आने लगा। बच्चों की फीस जमा करना भी भारी पड़ने लगी। ऐसे में बैतुलमाल के जरिये लोगों की मदद की गई। स्कूल ऐसी छात्राओं की सूची तैयार कर रहा है जिनको फीस जमा करने में परेशानी होने वाली है। लगभग 400 छात्राओं की फीस भी स्कूल अपने पास से जमा करेगा। बीते सत्र में बैतुलमाल से लगभग 350 छात्राओं की फीस जमा कराई गई थी। उन्हें नई ड्रेस खरीदने के लिए भी पैसे दिए गए।

जरूरतमंदों की मदद का जारी रहेगा सिलसिला

प्रधानाचार्य चमन जहां बताती हैं, बैतुलमाल एक अरबी शब्द है। इसका अर्थ है धन का सदन। यह सुल्तानों के लिए शाही खजाने के रूप में काम करता था। हमने इसका इस्तेमाल वंचितों की मदद के लिए किया है। लोगों के सहयोग से हम अपने लक्ष्य में सफल भी हो रहे हैं। जरूरतमंदों की मदद का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा।

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