ऑनलाइन डेटिंग दे रही पैटर्न एडिक्शन का घाव, रिश्तों में बढ़ रही अस्थिरता

Feb 16, 2026 01:49 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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Bareily News - डिजिटल युग में ऑनलाइन डेटिंग का चलन मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैटर्न एडिक्शन के कारण लोगों को रिश्तों में सामंजस्य बैठाने में कठिनाई हो रही है। हाल ही में जिला अस्पताल में इस समस्या के 56 मामले सामने आए हैं, जिनमें 38 किशोरियां शामिल हैं।

ऑनलाइन डेटिंग दे रही पैटर्न एडिक्शन का घाव, रिश्तों में बढ़ रही अस्थिरता

डिजिटल दौर में ऑनलाइन डेटिंग का बढ़ता चलन कई मानसिक परेशानी की भी वजह बन रहा है। आनलाइन डेटिंग एप्स और वेबसाइट को भले ही व्यस्त जीवनशैली में सुविधाजनक माना जा रहा है लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। खासकर मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है और पैटर्न एडिक्शन के मामले बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के मनकक्ष में बीते 10 दिनों में पैटर्न एडिक्शन से जुड़े 56 से अधिक मामले सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 38 किशोरियां और युवतियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन डेटिंग का एक जैसा पैटर्न व्यक्ति को व्यवहारिक लत की ओर धकेल रहा है, जिससे रिश्तों में सामंजस्य बैठाने की क्षमता कमजोर पड़ रही है।

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि ऑनलाइन डेटिंग में लगातार स्वाइप, मैच और त्वरित प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पांस) की आदत बन जाती है। यही आदत धीरे-धीरे पैटर्न एडिक्शन में बदल जाती है, जिसमें व्यक्ति एक जैसे व्यवहार और त्वरित संतुष्टि का आदी हो जाता है। जब अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो बेचैनी, घबराहट, तनाव और पैनिक जैसी समस्याएं उभरने लगती हैं। कई मामलों में यह स्थिति समायोजन विकार (एडजस्टमेंट डिसऑर्डर) तक पहुंच जाती है। विकल्पों की अधिकता से मानसिक दबाव ऑनलाइन डेटिंग में विकल्पों की अधिकता भी मानसिक दबाव बढ़ाती है। प्रोफाइल्स में दिखने वाली परफेक्ट इमेज वास्तविक जीवन से मेल न खाने पर निराशा पैदा करती है। वहीं, ऑफलाइन यानी आमने-सामने की मुलाकातों में बॉडी लैंग्वेज, आवाज और व्यवहार से वास्तविक केमिस्ट्री का आकलन हो पाता है, जिससे भरोसा और स्थायित्व अधिक बनता है। इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज के शोध के अनुसार, दीर्घकालिक, संतोषजनक और प्रतिबद्ध रिश्तों के लिए ऑफलाइन बातचीत अधिक प्रभावी मानी जाती है। सामंजस्य नहीं बैठ पाना बड़ी परेशानी डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि ऑनलाइन डेटिंग से कुछ महीनों बाद जब लोग ऑर्गेनिक (ऑफलाइन) डेटिंग की ओर बढ़ते हैं, तो उन्हें गंभीर एडजस्टमेंट इश्यू का सामना करना पड़ता है। ऑनलाइन पैटर्न की आदत के कारण धैर्य कम हो जाता है और रिश्तों में धीरे-धीरे समझ बनाने की क्षमता प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप, छोटे मतभेद भी बड़े टकराव में बदल जाते हैं। हालांकि, ऑनलाइन डेटिंग पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो व्यस्त हैं, शर्मीले हैं या विशिष्ट मानदंडों के आधार पर साथी तलाशना चाहते हैं।

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