जंग की तपिश: गैस बचाने की चिंता, बदल गया इफ्तार का पूरा दस्तरख्वान
Bareily News - - रोजेदारों ने तले-भुने व्यंजनों से बनाई दूरी, बाजार से खरीदी चीजों और फलों पर बढ़ा जोर ग्राउंड रिपोर्ट: जंग की तपिश:गैस बचाने की चिंता, बदल गया इफ्ता

रमजान के महीने में इस बार इफ्तार का दस्तरख्वॉन पहले जैसा नजर नहीं आ रहा है। जंग के कारण बढ़ती महंगाई और गैस बचाने की चिंता ने रोजेदारों की रसोई का मिजाज बदल दिया है। कई घरों में तले-भुने व्यंजनों की जगह अब हल्की और जल्दी तैयार होने वाली चीजें शामिल की जा रही हैं। रोजेदार राजिया, निदा ने बताया कि पहले जहां इफ्तार में तरह-तरह की पकौड़ियां, समोसे और चना-चाट जैसे व्यंजन आम तौर पर दिखाई देते थे, वहीं अब ये चीजें कई घरों से गायब हो गई हैं। गैस की खपत कम करने के लिए लोग तलने-भूनने वाले व्यंजनों से परहेज कर रहे हैं।
इसके स्थान पर दस्तरख्वॉन पर अब फलों की अलग-अलग किस्में और बाजार से खरीदी गई तैयार सामग्री ज्यादा नजर आ रही है। खजूर के साथ सेब, केला, पपीता और अन्य मौसमी फलों को इफ्तार में प्राथमिकता दी जा रही है। बिलकिस, निगहत, सना, फरहा ने बताया कि सहरी के खानपान में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कई घरों में पराठे और रोटी बनाने का चलन कम हो गया है। उनकी जगह बंद मक्खन और हल्के खाद्य पदार्थों को सहरी में शामिल किया जा रहा है, जिससे जल्दी तैयारी भी हो जाती है और गैस की खपत भी कम रहती है। रोजेदारों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए खर्च और ईंधन दोनों बचाने की कोशिश की जा रही है, इसलिए इस बार इफ्तार और सहरी का दस्तरख्वॉन पहले से अलग नजर आ रहा है।
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