कलम-दवात पर सियासत गरमाई, स्थानांतरण को लेकर बढ़ा विवाद

Newswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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Bareily News - कोहाड़ापीर क्षेत्र में कायस्थ समाज के प्रतीक चिह्न कलम-दवात को स्थानांतरित करने पर सियासत गरमा गई है। नगर निगम और समाज के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। पार्षदों ने मेयर को पत्र भेजकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कलम-दवात की स्थापना नगर निगम की अनुमति से हुई थी, इसलिए इसे हटाना उचित नहीं है।

कलम-दवात पर सियासत गरमाई, स्थानांतरण को लेकर बढ़ा विवाद

कोहाड़ापीर क्षेत्र में स्थापित कायस्थ समाज के प्रतीक चिह्न कलम-दवात को स्थानांतरित किए जाने पर अब सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे को लेकर समाज के लोगों और नगर निगम के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। पार्षदों ने मेयर, नगर आयुक्त को पत्र भेजकर सवाल पूछते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पार्षद सतीश चंद्र कातिब का कहना है कि कलम-दवात की स्थापना नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति और तत्कालीन नगर आयुक्त की अनुमति से की गई थी। ऐसे में अब इसे अतिक्रमण बताकर हटाने की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। यदि यह स्थल अवैध था तो उस समय इसकी अनुमति क्यों दी गई, बल्कि इसका उद्घाटन और लोकार्पण भी नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने क्यों किया।

इसके अलावा इस स्थल के सौंदर्यीकरण पर खर्च की गई धनराशि को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसे वित्तीय अनियमितता से जोड़ते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है। उन्होंने कहा कि उनकी भावनाओं से जुड़े इस प्रतीक चिह्न को किसी भी कीमत पर हटाया न जाए और इसे वर्तमान स्थान पर ही बनाए रखा जाए। मामले ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक बयानबाजी होने के संकेत मिल रहे हैं।

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