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15 नवंबर, 2020|12:59|IST

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वाल्मीकि रामायण के पाठ से भक्ति में डूबे लोग, हुआ दीपदान

वाल्मीकि रामायण के पाठ से भक्ति में डूबे लोग, हुआ दीपदान

1 / 2महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रशासन के सहयोग से वाल्मीकि सद्भावना मेला समिति ने शनिवार को वाल्मीकि मेला परिसर जाटवपुरा में पूरे उत्साह, श्रद्धा व भक्ति...

वाल्मीकि रामायण के पाठ से भक्ति में डूबे लोग, हुआ दीपदान

2 / 2महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रशासन के सहयोग से वाल्मीकि सद्भावना मेला समिति ने शनिवार को वाल्मीकि मेला परिसर जाटवपुरा में पूरे उत्साह, श्रद्धा व भक्ति...

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महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रशासन के सहयोग से वाल्मीकि सद्भावना मेला समिति ने शनिवार को वाल्मीकि मेला परिसर जाटवपुरा में पूरे उत्साह, श्रद्धा व भक्ति से समारोह का आयोजन किया। इसमें दोपहर 12:30 बजे से नव ज्योति नृत्य नाट्य संस्था ने हरजीत कौर के नेतृत्व में वाल्मीकि रामायण का संगीतमय पाठ किया। पाठ के दौरान संस्था के कलाकारों ने रामायण के स्वरूपों को जीवंत कर दिया। भगवान वाल्मीकि, राम, लक्ष्मण, सीता व लव-कुश, निषाद राज तथा माता शबरी के चरित्र व स्वरूप ने मंचन कर सबको प्रभावित किया। इससे पहले मेला परिसर में प्रात:काल वाल्मीकि आश्रम के महंत बाबा हरनाम दास ने हवन-पूजन के साथ अनुष्ठान किया।

रामायण पाठ का शुभारंभ नगर विधायक डॉक्टर अरुण कुमार ने किया। सांयकाल दीपदान कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने किया। मेला परिसर दीपों की रोशनी में झिलमिला उठा। दीपदान कार्यक्रम में मेयर डॉ. उमेश गौतम , विधायक राजेश कुमार मिश्रा, भाजपा नगर अध्यक्ष डॉ. केएम अरोड़ा, डीएम नीतीश कुमार, गुलशन आनंद, अपर जिलाधिकारी प्रशासन वीकेसिंह, नगर मजिस्ट्रेट मदन लाल, मेला समिति के अध्यक्ष मनोज थपलियाल, आकाश पुष्कर, सुनील दत्त, मीडिया प्रभारी योगेश बन्टी, अरविंद वाल्मीकि, बन्टी सिंह आदि का योगदान रहा।

कवि सम्मेलन में बुलंद हुई नारी शक्ति की आवाज

बरेली। कार्यक्रम में कवि रोहित राकेश के संयोजन में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्त्रम का प्रारंभ रुचि शुक्ला ने सरस्वती वंदना से किया। प्रेक्षा सक्सेना ने काव्य पाठ करते हुए कहा, कर खुद को बुलंद इतना कि तुझ में तू मिल जाए, नहीं तू किसी पर आधारित है तू आज की नारी है।

कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए रोहित राकेश ने कहा, कभी न हिले वो बुनियाद चाहिए, वतन हमेशा ही आबाद चाहिए। सुभाष राहत ने सुनाया, सजी फिर से अयोध्या है, जिधर देखो उजाला है, प्रभु श्रीराम का मंदिर निराला बनने वाला है। रितेश साहनी ने कहा, शब्दों के पार है परमात्मा, जीवन का सार है परमात्मा। बाकर जैदी, शालिनी मुक्ता ने भी रचनाएं पढ़ीं। संचालन अनिल नायर ने किया।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद का मना स्थापना दिवस

बरेली। शारद पूर्णिमा, महर्षि वाल्मीकि जयन्ती एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् स्थापना दिवस के अवसर पर राजेन्द्र नगर स्थिति सुरेश बाबू मिश्रा के निवास पर गोष्ठी आयोजित हुई। साहित्य भूषण सुरेश बाबू मिश्रा ने बताया कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद भारतीय भाषाओं का एक देशव्यापी संगठन है। प्रांतीय संयुक्त मंत्री रोहित राकेश ने बताया अखिल भारतीय साहित्य परिषद की स्थापना आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती शरद पूर्णिमा के दिन 27 अक्टूबर 1966 को दिल्ली में हुई। इसी वर्ष इसका राष्ट्रीय अधिवेशन प्रसिद्ध साहित्यकार जैनेंद्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था। सरदार जीत सिंह जीत को इसके संगठन का दायित्व सौंपा गया था। कार्यक्रम में सुभाष राहत, मीना अग्रवाल, अविनाश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

वाल्मीकि जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा

बरेली। भगवान वाल्मीकि जयंती पर शनिवार को भगवान वाल्मीकि शोभा यात्रा प्रबंधक समिति के तत्वाधान में प्राचीन भगवान वाल्मीकि मंदिर सिटी सब्जी मंडी पर पूजा हुई। उसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई। प्रभु राम के अवतार से पहले ही उनके जीवन काल को शब्दों में पिरोकर सृष्टि से अवगत कराने वाले भगवान वाल्मीकि के मंदिरों एवं आश्रमों में स्वयंसेवकों ने सफाई की। मूर्ति नर्सिंग होम चौराहे पर लगी भगवान वाल्मीकि की प्रतिमा पर सफाई के बाद सजावट हुई। इसके साथ ही सुर्खा बानखाना, सूद धर्मकांटा, डेलापीर पुराना शहर आदि स्थानों पर सफाई की गई।

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  • Web Title:People immersed in devotion from the recitation of Valmiki Ramayana Deepdan