Muslims in the Kurmi vote - कुर्मी वोट में की सेंधमारी पर मुस्लिमों की सुस्ती पड़ी भारी DA Image

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कुर्मी वोट में की सेंधमारी पर मुस्लिमों की सुस्ती पड़ी भारी

महागठबंधन के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार को 2014 के सपा और बसपा उम्मीदवारों के मुकाबले 14, 366 वोट ज्यादा मिले हैं। उन्होंने कुर्मी वोटों में सेंधमारी कर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के जीत के भारी अंतर को इस बार कम तो कर दिया, लेकिन अपनी हार नहीं बचा पाये। दरअसल, मुस्लिमों की खामोशी ने राजनीति की बिसात पर भगवत सरन गंगवार को चित कर दिया। मुस्लिमों ने भाजपा से तो परहेज किया लेकिन भगवत सरन गंगवार से भी किनारा कर लिया 2019 के चुनाव परिणाम कई लिहाज से दिलचस्प हैं। 2019 में भाजपा के संतोष गंगवार और गठबंधन के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार को पिछले चुनावों से ज्यादा वोट मिले हैं, लेकिन ओवरआल वोटिंग प्रतिशत घट गया है।

पिछले चुनाव में बरेली लोकसभा में 61 फीसदी वोट पड़े थे। इस बार 59.34 प्रतिशत पर ही मतदान रुक गया। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को 2014 के लोकसभा चुनाव में 5,18,258 वोट मिले थे। इस बार उन्हें 5,65,270 वोट मिले हैं जो कि पिछले वोटों की तुलना में 47,012 ज्यादा हैं। लेकिन उनकी जीत का अंतर पिछले लोकसभा चुनाव से 72,403 घट गया है। संतोष गंगवार ने 2014 का लोकसभा चुनाव 2,40,685 वोटों के भारी अंतर से जीता था। 2019 में जीत का अंतर 1,67,282 रह गया है। वोटिंग प्रतिशत घटने, लेकिन दोनों उम्मीदवारों के वोट बैंक बढ़ने के पीछे सेंधमारी मानी जा रही है। भगवत सरन गंगवार का वोट बैंक बढ़ने के पीछे कुर्मी वोटों में सेंधमारी और बसपा के कैडर वोट को सपा को ट्रांसफर होने की वजह माना जा रहा है। संतोष गंगवार के वोट बैंक बढ़ने के पीछे दो मुख्य वजह हैं। पहली कांग्रेस के प्रवीन सिंह ऐरन को पिछली बार 84,213 वोट मिले थे। इस बार उन्हें महज 74,206 वोट मिले हैं। उनका दस हजार वोट खिसककर भाजपा में चला गया। इसके अलावा हिंदू बाहुल्य इलाको में वोटिंग प्रतिशत का बढ़ना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

सपा, बसपा और कांगे्रस का गठबंधन भी नहीं रोक पाता संतोष का विजय रथ

बरेली में सपा, बसपा और कांगे्रस का गठबंधन भी संतोष गंगवार का विजय रथ नहीं रोक पाता। 2014 के लोकसभा चुनाव में तीनों दलों के प्रत्याशियों को 467835 वोट मिले थे। इस बार संतोष गंगवार को मिले वोटों से 97435 वोट कम हैं। 2019 के चुनाव में गठबंधन और कांग्रेस के वोट मिलाकर 472194 हैं। संतोष गंगवार को मिले वोट 565270 से 93076 कम हैं। इस वजह से तीनों प्रमुख पार्टियां मिलकर भी संतोष की विजय यात्रा को नहीं रोक पाईं। 

दस साल में कांग्रेस के हालात सपा जैसे 

कांग्रेस और सपा के बीच वोट बैंक को लेकर कड़ा मुकाबला रहा है। 2009 में बरेली लोकसभा सीट से सपा के प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को 73,549 वोट मिले थे। 2019 में कांग्रेस के प्रवीन सिंह ऐरन को 74206 वोट मिले हैं।

भाजपा से परहेज लेकिन भगवत से भी बनाई दूरी

मुस्लिमों ने भाजपा से परहेज किया लेकिन भगवत सरन गंगवार से भी उचित दूरी बनाये रखी। यही वजह रही कि कुर्मी वोटों में सेंधमारी, सपा बसपा का वोट बैंक इकट्ठा होने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली। मुस्लिमों ने भाजपा को वोट देने में परहेज किया, लेकिन उन्होंने भगवत को भी वोट नहीं दिया। इससे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में वोट प्रतिशत घट गया। कुछ जगहों पर तीन तलाक पीड़ित महिलाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले मुस्लिमों ने भाजपा को वोट दे दिया।

संतोष के गांव में भगवत को भी मिले 293 वोट 

भाजपा उम्मीदवार संतोष गंगवार ने आठवीं बार जीत हासिल करके इतिहास रचा है। संतोष के गांव ट्यूलिया में गठबंधन उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार सेंधमारी करने में कामयाब हुए। भगवत को वहां 293 लोगों ने वोट दिए। भाजपा उम्मीदवार संतोष गंगवार के ट्यूलिया गांव में 23 अप्रैल को 1606 मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। दो पोलिंग बूथों पर चुनाव हुआ। इसमें सबसे अधिक 1232 वोट भाजपा उम्मीदवार संतोष गंगवार को मिला। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रवीण सिंह ऐरन को इस गांव से 31 वोट मिले। गांव में चार लोगों ने नोटा का भी बटन दबाया।  

ऑडियो वाले नेताजी ने भी कर डाला गड़बड़झाला

सपा के एक बड़े नेता का आडियो वायरल हुआ था। इसमें वह प्रधानों से कह रहे थे कि साइकिल को वोट नहीं पड़ना चाहिये। वह मुस्लिम समाज के ऐसे नेता हैं, जिनके लिये कहा जाता है कि एक खास वर्ग का वोट बैंक उनके साथ रहता है। चाहे वह चुनाव जीतें या हारें। इसका असर भी भगवत सरन गंगवार के चुनाव पर पड़ा। जिसकी वजह से वह भोजीपुरा और नवाबगंज जैसी जगहों पर भी केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को मात नहीं दे पाये।

खिसकती गई कांग्रेस की जमीन, बढ़ती चली गई भाजपा

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रवीन सिंह ऐरन ने भाजपा सांसद संतोष गंगवार को 9338 वोटों से हराकर जीत का रथ रोक दिया था। प्रवीन सिंह ऐरन को 220976 वोट मिले थे, जबकि संतोष गंगवार को 211638 वोट मिले थे। बसपा के इस्लाम साबिर को 181996 वोट और सपा के भगवत सरन गंगवार को 73549 वोट मिले थे। दस सालों में भाजपा का वोट बैंक बढ़कर ढाई गुना हो गया, जबकि कांग्रेस का वोट बैंक खिसकता चला गया। 

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