
करोड़ों की ठगी करने वाला मेंथा कारोबारी गिरफ्तार कर भेजा जेल
Bareily News - बारादरी पुलिस ने मेंथा कारोबारी जयप्रकाश गंगवार को गिरफ्तार किया है। उसने निवेशकों से एक करोड़ रुपये हड़पने और जानलेवा हमले का आरोप स्वीकार किया है। गंगवार ने मुनाफा देने का झांसा देकर पैसे जुटाए और फिर न तो मुनाफा दिया और न ही मूल रकम लौटाई।
करोड़ों की रकम हड़पने और जानलेवा हमले के आरोपी मेंथा कारोबारी को बारादरी पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। उसने मेंथा का तेल खरीदकर मुनाफा कराने का झांसा देकर यह रकम हड़पी थी। उसके साथियों के बारे में पुलिस जानकारी कर रही है। इज्जतनगर में सिद्धार्थ कुंज, फेस-2 वीर सावरकर नगर निवासी आदर्श कुमार अग्रवाल ने सोमवार को थाना बारादरी में एकतानगर निवासी मेंथा कारोबारी जयप्रकाश गंगवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि करीब चार-पांच साल की जान पहचान का फायदा उठाकर जयप्रकाश ने मेंथा के तेल की खरीद-फरोख्त में अच्छा मुनाफा कराने का झांसा दिया।
शुरुआत में उन्होंने 10-15 लाख रुपये इस कारोबार में लगाए और साल भर पहले शिव कुमार अग्रवाल से लेकर चार बार में एक करोड़ रुपये जय प्रकाश गंगवार को दे दिए। इसके बाद जय प्रकाश की नीयत खराब हो गई और उसने न तो मुनाफा दिया और न मूल रकम वापस की। तकादे करने पर टालमटोल करने लगा। उन्होंने दबाव बनाया तो 15 नवंबर की शाम रुपये देने के बहाने बुलाकर जयप्रकाश ने तीन अन्य साथियों के साथ उन पर जानलेवा हमला कर दिया। बारादरी इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि गुरुवार दोपहर आरोपी जयप्रकाश गंगवार को संजयनगर होली चौक से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथियों की जानकारी की जा रही है। उसकी गिरफ्तारी की जानकारी पर तमाम लोग बचाव के लिए बारादरी थाने भी पहुंचे लेकिन इंस्पेक्टर ने उन्हें समझाकर लौटा दिया। धनी लोगों की रकम से कारोबार करता है आरोपी पुलिस की पूछताछ में जयप्रकाश ने बताया कि वह मेंथा मंडी में कारोबार करता है। मेंथा का तेल खरीदने के लिए वह धनी लोगों से संपर्क करता है और मुनाफे की बात करके रुपये लगवाता है। कम रकम में मेंथा का तेल खरीदकर रामपुर गार्डन में राजेंद्र गोटे वाले और मोहित अग्रवाल के गोदाम में रखता है और कीमत बढ़ने पर बेचता है। इससे उसे अच्छा मुनाफा हो जाता है। इस तरह उसने कई लोगों से रकम ले रखी है। मुनाफा देकर बढ़वाता था रकम पूछताछ में जयप्रकाश ने यह भी स्वीकार किया कि उसने आदर्श अग्रवाल समेत कई लोगों से रकम लगवाई थी। पहले लोग कम रकम लगाते हैं, जिसके चलते वह विश्वास बनाने के लिए मुनाफे की रकम दे देता है। मूल रकम आगे लगाने के लिए अपने पास रोक लेता है और मुनाफा का भरोसा बनने पर ज्यादा रकम का निवेश करा लेता है। ऐसा ही आदर्श अग्रवाल के साथ हुआ। कुछ दिन तो उसने मुनाफे की रकम दी लेकिन बाद में नीयत खराब हो गई तो मूलधन और मुनाफा, कुछ भी वापस नहीं किया। रकम देने का दबाव बनाया तो उसने मारपीट कर दी।

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