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इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की पूजा हराम: मौलाना शहाबुद्दीन

इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की पूजा हराम: मौलाना शहाबुद्दीन

संक्षेप:

Bareily News - बरेली में मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने एक धार्मिक सम्मेलन में इस्लाम की बुनियादी शिक्षा तौहीद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम में केवल एक खुदा की इबादत की जाती है और अन्य पूजा हराम है। उनका बयान इस्लाम की शिक्षाओं को स्पष्ट करने और गलतफहमियों को दूर करने के लिए था।

Dec 18, 2025 01:04 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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बरेली। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने संत कबीर नगर में आयोजित एक दूसरे धर्म के धार्मिक सम्मेलन में कही गई बातों पर प्रतिक्रिया दी है। जारी अपने बयान में मौलाना ने कहा कि इस्लाम मजहब पूरी तरह अपने उसूलों पर कायम है और हमारे समाज के लोग सिर्फ एक खुदा की ही इबादत करते हैं। गुरुवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं को स्पष्ट किया है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि कुछ संगठन और नेता सूर्य नमस्कार, धरती, नदी और पेड़-पौधों की पूजा करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इस्लाम में इन तमाम चीजों की पूजा करना शरीयत में हराम है।

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मुसलमान न तो इनकी पूजा कर सकता है और न ही इसकी इजाजत इस्लाम देता है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कोई मुसलमान खुदा के सिवा किसी और की पूजा करता है, तो वह इस्लाम के दायरे से बाहर हो जाएगा। इस्लाम को मानने की सबसे पहली और बुनियादी शर्त तौहीद है, यानी एक खुदा को मानना और उसी की इबादत करना। तौहीद इस्लाम का मूल कानून है, जिसमें किसी और की पूजा या साझेदारी की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि खुदा के सिवा किसी और की पूजा करना इस्लाम में हराम है। -- इस्लाम को मानने की शर्त ही एक खुदा मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि इस्लाम को मानने की सबसे पहली और अहम शर्त तौहीद है, जिसका मतलब है एक खुदा को मानना और उसी की इबादत करना। तौहीद इस्लाम का मूल कानून है और इसमें किसी भी तरह की साझेदारी या अन्य पूजा की कोई गुंजाइश नहीं है। मौलाना ने कहा कि उनका यह बयान किसी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं को सही तरीके से रखने और फैल रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए है। उन्होंने सभी से एक-दूसरे के धार्मिक उसूलों का सम्मान करने की अपील भी की।