पहले झोलाछाप ने किया खिलवाड़, अब अफसर कर रहे खेल
Bareily News - झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई में तीन सप्ताह की देरी के बाद अब अधिकारी मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। युवक का गलत ऑपरेशन करने का आरोप है, जिससे उसकी जान खतरे में है। नोडल अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की, जबकि झोलाछाप ने खुद ऑपरेशन की बात स्वीकारी। अब परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है।

झोलाछाप के खिलाफ जांच के नाम पर तीन सप्ताह तक टालमटोल करने वाले अधिकारी अब पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। ऑपरेशन के बाद युवक की जान पर संकट गहराता जा रहा है। उधर, जांच के लिए बनी कमेटी तय ही नहीं कर पाई कि ऑपरेशन झोलाछाप ने किया था या नहीं। चौंकाने वाली बात यह है कि झोलाछाप ने मरहम-पट्टी करने की बात खुद ही बताई, लेकिन नोडल अधिकारी ने फिर भी उसके खिलाफ तीन सप्ताह तक मुकदमा दर्ज कराने की जरूरत नहीं समझी। बारादरी के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल ने आरोप लगाया कि उसके बेटे अजय का पीलीभीत बाईपास स्थित प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक पर झोलाछाप जयवीर ने गलत ऑपरेशन कर दिया था।
जयवीर ने पेशाब की जगह में पानी भरने की बात बताई और उसका ऑपरेशन कर दिया था, जबकि उसकी आंत में बीमारी थी। गलत ऑपरेशन की वजह से अब उसे लगातार रक्तस्राव हो रहा है और वह चलफिर भी नहीं पा रहा है। परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां से उसे मेरठ हायर सेंटर भेजा गया था। मेरठ और दिल्ली में डॉक्टरों ने युवक को जवाब दे दिया है। मामला तूल पकड़ने के बाद अब अधिकारी अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे और मुकदमा दर्ज कराने को कार्रवाई बता रहे हैं। झोलाछाप पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों इस मामले में झोलाछाप के खिलाफ नोडल अधिकारी के रहमदिली दिखाने को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है। नोडल अधिकारी ने शासनादेश को भी ताक पर रख दिया। झोलाछाप की क्लीनिक तो सील की, लेकिन उस पर विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू नहीं की, जबकि पंजीकरण और झोलाछाप के नोडल को शासनादेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके साथ ही बीते 6 माह में एक भी झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होना भी सवाल के घेरे में है।
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