जंग की तपिश: क्रय केंद्रों पर बारदाने की कमी से गेहूं खरीद पर पड़ सकता है असर

Apr 07, 2026 10:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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Bareily News - मध्यपूर्व में युद्ध के कारण बरेली मंडल में गेहूं खरीद व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बारदाने की कमी के कारण किसानों को गेहूं बेचने में मुश्किल हो सकती है। प्लास्टिक दानों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे बारदाना उद्योग प्रभावित हुआ है। उत्पादन लागत बढ़ने से बारदाना की उपलब्धता घट गई है।

जंग की तपिश: क्रय केंद्रों पर बारदाने की कमी से गेहूं खरीद पर पड़ सकता है असर

मध्यपूर्वी देशों में जारी युद्ध का असर अब प्रदेश की गेहूं खरीद व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। बरेली मंडल के क्रय केंद्रों पर बारदाने (बोरों) की कमी सामने आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में किसानों को गेहूं बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो स्टोरेज और खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। दरअसल, बरेली मंडल में एक अप्रैल से गेहूं खरीद का अभियान शुरू हो चुका है। मंडल के चार जिलों में कुल 452 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें बरेली में 107, बदायूं में 89, पीलीभीत में 110 और शाहजहांपुर में 146 केंद्र शामिल हैं।

हालांकि शुरुआत से ही इन केंद्रों पर लक्ष्य के अनुरूप बारदाने की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। बारदाने की कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण प्लास्टिक के कच्चे माल की घटती आपूर्ति बताया जा रहा है। बारदाना बनाने वाली कंपनियों के अनुसार, मध्यपूर्वी देशों में युद्ध के चलते क्रूड ऑयल का आयात प्रभावित हुआ है। इससे ऑयल कंपनियों ने प्लास्टिक के दानों (ग्रेन्यूल्स) का उत्पादन कम कर दिया है, जिसका सीधा असर बारदाना उद्योग पर पड़ा है।उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बरेली की कंपनियों को उनकी मांग के मुकाबले महज 25 फीसदी प्लास्टिक दानों की ही सप्लाई मिल पा रही है। इसका असर कीमतों पर भी पड़ा है। एक महीने पहले तक 95 रुपये प्रति किलो मिलने वाला प्लास्टिक दाना अब बढ़कर 155 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कच्चे माल की महंगाई के चलते बारदाना उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है।इस स्थिति का नतीजा यह है कि बारदाना बनाने वाली इकाइयों का उत्पादन घटकर करीब 20 फीसदी रह गया है। उत्पादन में आई इस भारी गिरावट से क्रय केंद्रों तक पर्याप्त बोरे नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में किसान एक साथ गेहूं लेकर केंद्रों पर पहुंचते हैं, तो उसके भंडारण में दिक्कत आ सकती है।रामकुमार एग्रो प्रोडक्ट के संचालक राजीव अग्रवाल ने बताया कि युद्ध के कारण प्लास्टिक के दानों की आमद में भारी कमी आई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और कंपनियां सामान्य स्तर पर काम नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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