
आधुनिक संसाधनों से हृदय रोगों के इलाज में क्रांतिकारी सुधार
Bareily News - आईएमए की प्रदेश स्तरीय कांफ्रेंस यूपीकॉन में पहले दिन कार्डियोलॉजी पर क्लीनिकल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हृदय रोग की बढ़ती समस्या, इलाज के नए तरीके और वायु प्रदूषण के प्रभाव पर चर्चा की। 1000 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया और हृदय रोगियों के इलाज में संसाधनों में वृद्धि को बताया।
आईएमए की प्रदेश स्तरीय कांफ्रेंस यूपीकॉन में शनिवार को पहले दिन कार्डियोलॉजी पर क्लीनिकल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। अलग-अलग शहरों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हृदय रोग की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई और साथ ही इलाज, बचाव पर मंथन किया। प्रदेश कार्यकारिणी बैठक और क्लीनिकल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर शरद अग्रवाल ने किया। कार्यकारिणी की बैठक में अलग-अलग जिलों से आए पदाधिकारी ने अपनी समस्याओं और गंभीर मुद्दों पर बात की। साइंटिफिक चेयरमैन डॉक्टर सुदीप सरन ने कहा कि हृदय रोग के इलाज में बेहतर संसाधनों की वजह से क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। अब सही समय पर सही जगह और सही इलाज से मरीजों की जान बचाई जा रही है।
पेसमेकर, स्टंट, इंट्राकार्डियक इंप्लांट जैसी अत्याधुनिक विधियां हृदय रोगियों के लिए वरदान साबित हो रही है। पहले दिन कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों, युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे और वायु प्रदूषण के चलते हार्ट अटैक के रोगी बढ़ने को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। क्लीनिकल कॉन्फ्रेंस में आईएमए के स्टेट प्रेसिडेंट डॉक्टर रवीश अग्रवाल, डॉक्टर विनोद पा, डॉक्टर विमल भारद्वाज, अध्यक्ष डॉ अतुल श्रीवास्तव, डॉ अनूप आर्य ने बाहर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्वागत किया। कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग शहरों से 1000 से अधिक चिकित्सक शामिल हुए हैं। इस मौके पर डॉ पुनीत सोंधी, डॉक्टर लाइक अंसारी, डॉ रजत अग्रवाल, डॉ रितु राजीव, डॉ. शालिनी माहेश्वरी,डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. राशि अग्रवाल, डॉ. मधु गुप्ता, शाहिदा अली, डॉ. हिमांशु अग्रवाल, स्ट्रेस बढ़ा रहा हार्ट अटैक का खतरा मेदांता गुड़गांव के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर कार्तिकेय भार्गव ने हृदय रोग के बढ़ते खतरे और इलाज के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाइफ स्टाइल, शराब का अधिक सेवन, स्मोकिंग, व्यायाम नहीं करना, ब्लड प्रेशर, शुगर हृदय रोग का बड़ा कारण है। इसके साथ ही सोशल मीडिया का स्ट्रेस भी हृदय रोग की बड़ी वजह है। बच्चों में आउटडोर गेम करीब बंद हो गया है और स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। डॉक्टर कार्तिकेय भार्गव ने बताया कि अब तक हुई रिसर्च से पता चला है कि कोविड वैक्सीनेशन का कार्डियक अरेस्ट में कोई रोल नहीं है। उन्होंने महानगर में बढ़ते प्रदूषण पर भी बात की और कहा यह राजनीतिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। हृदय रोगों के इलाज में बढ़े संसाधन मेदांता अस्पताल के डॉक्टर अमित चंद्रा ने कहा कि हृदय रोग के इलाज में संसाधन बढ़ रहे हैं। वॉल रिपेयर करने से कहीं बेहतर विकल्प वॉल रिप्लेसमेंट का है। न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर विनय गोयल ने स्ट्रोक पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से लकवा और ब्रेन हेमरेज तक हो सकता है। ब्लड प्रेशर, शुगर, तंबाकू - शराब का अधिक सेवन स्ट्रोक की बड़ी वजह है। डॉक्टर प्रवीण चंद्रा ने एंजियोप्लास्टी, लेजर तकनीकी के बारे में बताया। दूध नहीं पीना, पसीना आना है हृदय रोग के लक्षण वरिष्ठ पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अमित मिसरी ने बच्चों में हृदय रोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 8 से 10% बच्चों में जन्मजात बीमारी होती है। इन बच्चों में करीब एक तिहाई बच्चे किसी ने किसी हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। आमतौर पर ऐसे बच्चे एक माह से अधिक नहीं जी पाते हैं। उन्होंने कहा कि शिशु का वजन कम होना, शरीर नीला पड़ना, बच्चे का दूध नहीं पीना, थक जाना, पसीना आना, सांस तेज चलना हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे बच्चों का तत्काल ट्रीटमेंट जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई बार 35- 40 साल तक हृदय रोगों के लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। उन्होंने फ़ैटल इको कार्डियोलॉजी, डाउन सिंड्रोम के बारे में भी जानकारी दी।

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