ट्रैक्टर-ट्रालियों की भरमार से ट्रांसपोर्टर्स के व्यापार पर सीधा असर
Bareily News - : शिकायतों के बाद ही अंकुश लगाने को नहीं तैयार जिम्मेदार अफसर खेती किसानी में काम आने वाले ट्रैक्टर-ट्राली वर्तमान में ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय में बड़ी बाधा बन गये हैं। सैकड़ों की संख्या में...

: शिकायतों के बाद ही अंकुश लगाने को नहीं तैयार जिम्मेदार अफसर : ट्रांसपोर्ट यूनियन डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग कर चुकी -- बरेली, वरिष्ठ संवाददाता खेती किसानी में काम आने वाले ट्रैक्टर-ट्राली वर्तमान में ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय में बड़ी बाधा बन गये हैं। सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रालियां अधिकारियों और सफेदपोशों के संरक्षण में चल रही हैं। जो काम ट्रक-डीसीएम से होता था, उसे अब कम भाड़े के चलते ट्रैक्टर-ट्रालियों से कराया जा रहा है। ट्रकों पर पांबदी लगाई जा रही, जबकि जिले में 500 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रालियां चल रही हैं। कुछ दलालों के माध्यम से ट्रैक्टर-ट्रालियों का पैसा कलेक्ट करके बंदरबाट करने का भी आरोप है।
बरेली ट्रांसपोर्ट यूनियन डीएम से शिकायत कर चुकी है। ईंट भट्टा की बात हो या सीमेंट-रेता बजरी की साइट। इतना ही नहीं यहां चीनी मिलों में ट्रैक्टर ट्राला चलते हैं। जिनमें एक ट्रक से अधिक माल आता है। इसी तरह से चनेहटी स्टेशन सीमेंट लोडिंग साइट पर भी है। जिले में ईंट-भट्टों पर 250 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रालियां हैं। लोडिंग साइट पर 100 के आसपास, इसी तरह से चीनी मिलों और रेता बजरी के काम में करीब 150 से अधिक ट्रैक्टर-ट्राली चलती हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियां कुछ सफेदपोश और अधिकारियों के संरक्षण में महीने बांधकर चलवाई जा रही हैं। आरोप है, प्रति ट्राली से 5000 से 8000 रुपये तक महीना लिये जाते हैं। जो काम ट्रैकों का था, अब कम भाड़े के चलते ट्रैक्टर-ट्रालियों से कराया जाता है। ट्रैक्टर-ट्रालियों के चार-पांच ठेकेदार हैं, जो प्रति ट्राली कलेक्शन करके अधिकारियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबारों को हवा देते हैं। ट्रक मालिक भूख की कगार पर है। उनकी किश्ते निकलना मुश्किल है। बरेली ट्रक ऑनर्स एंड ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शोभित सक्सेना का कहना है, वह ट्रैक्टर-ट्रालियों को बंद कराए जाने की कई बार मांग कर चुके हैं। अधिकारियों से मिले। डीएम से भी शिकायत की गई। इसके बाद भी ट्रैक्टर-ट्रालियां कामर्शियल कार्यों में धड़ल्ले से चल रही है। किसी का कामर्शियल परमिट नहीं है। इससे ट्रांसपोर्टर्स को बड़ा नुकसान हो रहा है। काफी लोगों ने अपने ट्रक बेच दिये हैं। इससे सरकार को बड़े राजस्व की हानि भी हो रही है।
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