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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशअपराध पर कैसे लगेगी लगाम, तीसरी आंख का सिस्टम पर सवाल

अपराध पर कैसे लगेगी लगाम, तीसरी आंख का सिस्टम पर सवाल

हिन्दुस्तान टीम,बरेलीNewswrap
Thu, 08 Jul 2021 03:42 AM
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...
1/ 3स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...
2/ 3स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...
3/ 3स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे...

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 166 करोड़ के प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत होने से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अपराध पर लगाम कसने के लिए शहर के प्रमुख जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी ने लापरवाही बरती है। जहां कैमरे लग रहे हैं वहां उनके बाक्स के तार को अंडरग्राउंड की जगह खुले में डाल दिया गया है। मेयर डॉ. उमेश गौतम के पास इस खामियों की शिकायत पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण कर एक्शन लेना होगा।

शहर की सुरक्षा को लेकर स्मार्ट सिटी परियोजना के आईसीसीसी प्रोजेक्ट को अमेरिकन कंपनी को 166 करोड़ का टेंडर दिया। नगर निगम कैंपस में नई बिल्डिंग में सेंटर खोला जा रहा है। जून में केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी स्मार्ट सिटी, अमृत और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी की छठी वर्षगांठ के मौके पर आईसीसीसी का सॉफ्ट लांच किया था। इस मौके पर कंपनी ने दावा किया था कि शहर में 900 कैमरे लगाए जाएंगे। मेयर डॉ. उमेश गौतम ने बताया कि हमारे पास शिकायत आई है कि जो सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं उनमें तमाम तरह की खामियां बरती जा रही है।

कैमरों का फाउंटेन तो बना दिया लेकिन तारों को अंडरग्राउंड की जगह खुले में लगाए गए हैं। यह छोटी नहीं बल्कि बड़ी लापरवाही है। एक तरफ अपराधियों पर लगाम कसने के लिए प्रयास हो रहे हैं, वहीं कंपनी के लोगों ने अपराधियों को तार काटकर अपराध करने का मौका देने का काम किया है। कंपनी के लोग प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट काम नहीं कर रहे हैं। मेयर ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।

यह होगी उपलब्धियां

-नया बरेली क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और मार्गों पर सीसीसीटी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे चौबीस घंटे मॉनीटरिंग हो सकेगी।

-नए शहर के प्रवेश-निकास द्वारों और महत्वपूर्ण स्थानों पर 300 नाइट विजन कैमरे लगेंगे जो रात में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

-आपराधी वारदात करके नया बरेली शहर के किस क्षेत्र में हैं और किस दिशा में भाग रहे, उनका तत्काल लोकेशन देखा जा सकेगा।

-अपराध के बाद कैमरे की रिकॉर्डिंग जांच और साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल की जा सकेगी।

-कोई भी हादसा होने पर पुलिस के डायल 100, 108 एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की सुविधा जल्द मिल सकेगी।

-शहर के कॉमर्शियल, आवासीय भवन में लगे कैमरों से कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा।

पुलिस को मिलेगी मदद

शहर में अपराधिक घटनाओं पर लगाम लगेगी। हाईटेक कैमरों के जरिए शहर में प्रवेश करने वाले की खुद-ब-खुद पहचान हो जाएगी। अपराधियों की पहचान के बाद पुलिस उनके आपराधिक कृत्यों को नाकाम करने का प्रयास करेंगे। प्रोजेक्ट के तहत 145 जगहों पर ये हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। कमांड सेंटर कंट्रोल रूम से इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। जिससे पुलिस को मदद मिलेगी।

प्रोजेक्ट में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देंगे:मेयर

आईसीसीसी प्रोजेक्ट के तहत शहर को स्मार्ट बनाया जा रहा है। आमजन के सहयोग से शहर की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर ट्रैफिक कंट्रोल को बेहतर किया जाना है। जो कंपनी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है उसने तमाम खामियां बरती हैं। मामला गंभीर है इसलिए गुरुवार को निरीक्षण किया जाएगा।

- डॉ. उमेश गौतम, मेयर

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